गणाईगंगोली की रामलीला में राम-सीता विवाह के बाद निकली झांकी
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वड्डा की रामलीला में भरत चित्रकूट और सूर्पणखा के नाक, कान काटने की लीला का मंचन किया गया। गणाईगंगोली की रामलीला में राम विवाह का मंचन किया गया। बाजार में झांकी निकाली गई। डीडीहाट के हाटथर्प की रामलीला में वनवास का मंचन हुआ।
वड्डा की रामलीला में राम, लक्ष्मण, सीता के वन जाने के बाद वियोग में राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं। भरत तीनों माताओं और शत्रुघ्न के साथ राम को मनाने पंचवटी पहुंचते हैं। भगवान राम अयोध्या लौटने से मना करते हुए कहते हैं- लवटि जाओ घर को, पलटि जाओ घर को भारत वीर। बैठि अयोध्या राज करो भैय्या निर्मल सरयू तीर। भूखन को भैय्या भोजन दीजो, नंगन को पहनाओ चीर भारत वीर। इसके बाद पंचवटी में सूर्पणखा राम, लक्ष्मण को रिझाने की कोशिश करती है। लक्ष्मण सूर्पणखा के नाक, कान काट लेते हैं। वड्डा की रामलीला में जाजरदेवल थाने के पुलिस कर्मियों ने जागरूकता अभियान चलाया।
गणाईगंगोली में राम विवाह का सुंदर मंचन किया गया। बाजार में राम बारात की झांकी निकाली गई। राजतिलक की तैयारियों के बीच राम को 14 वर्ष का वनवास और भरत को राजगद्दी मिल जाती है। भगवान राम लक्ष्मण और सीता माता के साथ वन को प्रस्थान करते हैं। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष ललित उपाध्याय ने सभी का आभार जताया। रामलीला संचालन में शंभु सिद्धार्थ पांडेय, कैलाश कोठारी, नयन बाणी, खिलपति पांडे आदि सहयोग कर रहे हैं।
डीडीहाट के हाटथर्प की रामलीला में कोपभवन में बैठी कैकई से राजा दशरथ का संवाद होता है। कैकई अपने हठ पर अड़ी रहती है। हार मानकर राजा दशरथ राम को वनवास, भरत को राजगद्दी का वरदान दे देते हैं। राम, लक्ष्मण, सीता वन को चल देते हैं।