धारचूला के नजंग में लोनिवि द्वारा तैयार लकड़ी का पुल
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आपदा से लोनिवि अस्कोट डिविजन को 5.13 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अब पुनर्निर्माण के कार्य कराने के लिए भी धनराशि की कमी आड़े आ रही है। यदि समय पर धनराशि जारी नहीं हुई तो कई महत्वपूर्ण कार्य अटक सकते हैं।
इस वर्ष जुलाई में आपदा ने धारचूला और मुनस्यारी में खासा नुकसान पहुंचाया। सड़कें जहां-तहां ध्वस्त हो गई। कई स्थानों पर नालों पर बने पक्के, कच्चे पुल बह गए। कहीं भूस्खलन से दीवारें तो कहीं कलवर्ट ध्वस्त हो गए। ग्रामीण क्षेत्रों में कई दिनों तक आवागमन ठप रहा। लोनिवि अस्कोट डिविजन के अधिशासी अभियंता दीपक गुप्ता ने बताया कि सात मोटर पुलों के बहने से दो करोड़ सात लाख का नुकसान हुआ है। बताया कि सिमखोला, मालपा, नजंग, घटखोला, मांगडांग, फग्वाबगड़ और रोतिसगाड़ के पैदल पुल ध्वस्त हो गए।
इनके अलावा तवाघाट-नारायण आश्रम, ओगला-भागीचौरा-पसमा, कनालीछीना-पीपली, गोवर्षा-ख्वांकोट, जौलजीबी-टनकपुर समेत 16 सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से तीन करोड़ छह लाख का नुकसान पहुंचा। अब भी भूस्खलन होने से सड़कों के क्षतिग्रस्त होने का क्रम जारी है। उन्होंने बताया कि शासन और डीएम को नुकसान का आकलन कर भेज दिया गया है। कहा कि कई स्थानों पर पुनर्निर्माण के कार्यों के लिए तुरंत धनराशि की आवश्यकता है। यदि समय पर धन जारी नहीं हुआ तो कार्यों पर असर पड़ सकता है।
कैलाश मानसरोवर मार्ग पर काम पर जुटे हैं श्रमिक
पिथौरागढ़। कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर लोनिवि की ओर से नजंग में फिलहाल आवागमन के लिए लकड़ी के पुल की व्यवस्था कर दी गई है। यहां पर लोहे का पुल बनाने के लिए विभाग को धनराशि की आवश्यकता है। यात्रा मार्ग पर कार्य कराना भी बेहद खतरनाक हो रहा है। यहां बीआरओ द्वारा रोड कटिंग का कार्य किया जा रहा है। इसके चलते भूस्खलन और बोल्डर गिरने का खतरा बना है। ईई दीपक गुप्ता ने बताया कि यदि यहां लकड़ी के पुल और पैदल मार्ग को नुकसान पहुंचता है तो इससे ऊपरी क्षेत्र के गांवों को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।