चंपावत। लोहाघाट डिपो की दो बसें टायरों के अभाव में वर्कशॉप में खड़ी हैं। इसके चलते दिल्ली की दो बस सेवाएं बंद हैं। रोडवेज बस सेवा बाधित होने से इन रूटों पर यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों को टैक्सियों में अधिक किराया चुकाने के साथ ही वाहन बदलकर यात्रा करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
उत्तराखंड परिवहन निगम के लोहाघाट डिपो के पास पहले से बंद रूटों पर बस सेवाएं संचालित करने के लिए 14 नई बसों की दरकार है। वहीं, टायरों की कमी के चलते यूके 07 पीए 6031 और यूके 07 पीए 6011 नंबर की बसें वर्कशॉप में खड़ी हैं। इनमें यूके 07 पीए 6031 नंबर की बस लोहाघाट से देवीधुरा होते हुए दिल्ली और यूके 07 पीए 6011 नंबर की बस लोहाघाट से टनकपुर होते हुए दिल्ली संचालित होती थी। इन रूटों पर बीते आठ दिनों से बस सेवा ठप है। डिपो में तैनात वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी ने बताया कि वर्तमान में डिपो को 30 टायरों की आवश्यकता है। कहा कि यदि समय पर टायर उपलब्ध नहीं हुए तो अन्य बसों को भी वर्कशॉप में खड़ा करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि टायरों की मांग के लिए उन्होंने आरएम कार्यालय टनकपुर को पत्र भेजा है।
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34 से घटकर 27 रह गईं बसें
जून 2025 तक डिपो के पास 34 बसें थीं। वर्तमान में मानक पूरा कर चुकी सात बसों को टनकपुर डिपो में जमा कर दिया गया है। इसके चलते डिपो के पास अब केवल 27 बसें रह गई हैं। बंद रूटों पर बसों का संचालन शुरू करने के लिए डिपो को 14 नई बसों की दरकार है।
लोहाघाट रोडवेज डिपो को नई बसें उपलब्ध कराने की जरूरत है। पुरानी बसों के सहारे यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा देना मुश्किल हो रहा है। सरकार और रोडवेज प्रबंधन को यात्रियों की सुविधा को देखते हुए डिपो में नई बसों के साथ ही टायर भी उपलब्ध कराने चाहिए।
अशोक वर्मा, स्थानीय
बसों की कमी को दूर करने की जरूरत है। पर्याप्त संख्या में बसें नहीं होने से कई बार कुछ रूटों पर नियमित बस सेवा प्रभावित होती है। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। परिवहन विभाग को नई बसों की व्यवस्था कर नियमित संचालन सुनिश्चित करना चाहिए।
मनीषा, स्थानीय
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वर्जन :
टायर देहरादून से आते हैं। कांवड़ यात्रा के कारण टायर पहुंचने में कुछ समय लग रहा है। जल्द ही टायर उपलब्ध होते ही उन्हें लोहाघाट वर्कशॉप भेज दिया जाएगा।
- आलोक कुमार बनवाल, आरएम, टनकपुर