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निजी प्रयासों से तैयार किया ज्ञानप्रकाश पुस्तकालय

Sun, 13 Sep 2015 10:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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 इसे हिंदी के प्रति प्रेम एवं साहित्य के प्रति अनुराग ही कहा जा सकता है कि आज डा. पीतांबर अवस्थी के बजेटी गांव में स्थित ज्ञानप्रकाश सार्वजनिक पुस्तकालय में हिंदी साहित्य और हिंदी में लिखी गई 15 हजार से ज्यादा पुस्तकों का संग्रह हो चुका है। इस पुस्तकालय में आपको चंद्रधर शर्मा गुलेरी की ‘उसने कहा था’ कहानी से लेकर वर्तमान पीढ़ी के साहित्यकार उदयप्रकाश की ‘तिरिछ’ जैसा कहानी संग्रह भी पढ़ने को मिल जाएगा। कुमाऊं के लगभग हर रचनाकर्मी की किताब पुस्तकालय की शोभा बढ़ा रही है। इसमें रत्ना पंत, शैलेश मटियानी, बटरोही, डा. शेखर पाठक, शिवानी, देवसिंह पोखरिया, जगत सिंह बिष्ट, शीतांशु भारद्वाज, प्रयाग जोशी आदि रचनाकारों की लिखी हुई किताबें हैं।
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डा. अवस्थी बताते हैं कि 1996 में उनको एक कबाड़ वाले के पास हिंदी साहित्य की कुछ किताबें मिली थी। उसे कुछ पैसे देकर वह घर ले आए। उसके बाद उन्होंने ठान लिया कि हिंदी की पुस्तकों को पूरा सम्मान दिया जाएगा। वर्ष 2003 में उन्होंने ज्ञानप्रकाश पुस्तकालय तैयार किया, इसमें तुलसी, कबीर, जायसी, सूरदास, मीराबाई, अज्ञेय, मुक्तिबोध, त्रिलोचन शास्त्री, हजारीप्रसाद द्विवेदी, जयशंकर प्रसाद, प्रेम चंद, मनु शर्मा की पुस्तकों के अलावा इतिहास, संस्कृति, समाज विज्ञान, साहित्य, आलोचना, जीवन दर्शन, गढ़वाली, कुमाऊंनी शब्दकोष, व्यावसायिक क्षेत्र में हिंदी का प्रयोग समेत हजारों पुस्तकों का संग्रह है।
डा. अवस्थी बताते हैं कि यदि कभी बड़े शहरों में जाने का मौका मिला तो वहां से दो-चार पुस्तकें जरूर खरीद लाते हैं। कुछ हिंदी प्रकाशन समूहों से वह नियमित किताबें मंगाते रहते हैं। वह दावे के साथ कहते हैं कि उनके पुस्तकालय में सभी विषयों के संदर्भ ग्रंथ मौजूद हैं।
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