पिथौरागढ़। सीमांत जिले पिथौरागढ़ में पिछले नौ माह में वर्ष 2022 की तुलना में कम बारिश हुई है। बारिश कम होने से प्राकृतिक जल स्रोत रिचार्ज नहीं हो पाए हैं। अगर सर्दियों में बारिश और बर्फबारी कम हुई तो जिले के कई इलाकों में पेयजल संकट गहरा सकता है।
बारिश के कम होने का असर प्राकृतिक जल स्रोतों पर साफ दिखाई दे रहा है। पिथौरागढ़ से धारचूला तक करीब 100 स्थानों पर मानसूनकाल खत्म होने के बाद पहाड़ियों से पानी बहता रहता था लेकिन इस बार कुछ ही स्थानों पर पानी दिख रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में नौले और धारों में भी कम बारिश का असर दिख रहा है।
इधर बारिश कम होने का असर धान, मड़ुवे और बागवानी पर असर पड़ा है। वर्तमान में कृषि विभाग और उद्यान विभाग ने उत्पादन के आंकड़े एकत्र नहीं किए हैं। इस बार उत्पादन कम होने की संभावनाएं जताई जा रही है। राज्य मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विक्रम सिंह का कहना है कि इस बार पिथौरागढ़ में कम बारिश हुई है। अन्य स्थानों में ठीक बारिश हुई है। इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। संवाद
पिछले और इस वर्ष बारिश की तुलना मिमी में
वर्ष 2022 बारिश वर्ष 2023 बारिश
जनवरी 501.50 जनवरी 82.20
फरवरी 314.80 फरवरी 42.60
मार्च 31.50 मार्च 322.70
अप्रैल 96.20 अप्रैल 258.10
मई 1005.50 मई 614.50
जून 1210.80 जून 928.40
जुलाई 2861.50 जुलाई 2692.60
अगस्त 2168.30 अगस्त 2440.30
सितंबर 1950.60 सितंबर में 892.80
मौसम के साफ रहने का अनुमान
पिथौरागढ़। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विक्रम सिंह का कहना है कि राज्य में आठ से 10 दिन तक मौसम साफ रहने का अनुमान है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात और बारिश हो सकती है। निचले क्षेत्रों में मौसम साफ रहेगा लेकिन ठंडी हवाएं चल सकती हैं। संवाद