फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pithoragarh News: पिथौरागढ़ में बदला तेंदुओं का प्राकृतिक आवास, हर दो से तीन किमी में मौजूदगी

Mon, 29 Jun 2026 11:02 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में तेंदुओं के बदलते प्राकृतिक आवास और उनकी बढ़ती आबादी ने वन विभाग समेत आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। वन विभाग के चौंकाने वाले खुलासे के मुताबिक अमूमन 24 किलोमीटर के दायरे में रहने वाला तेंदुआ अब यहां हर दो से तीन किलोमीटर के भीतर मौजूद है। लंबे समय से गणना न होने के बावजूद बस्तियों में इनकी बढ़ती सक्रियता साफ गवाही दे रही है कि तेंदुओं का कुनबा तेजी से बढ़ा है जो अब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का नया पर्याय बन चुका है।
विज्ञापन

नगर के पांच किलोमीटर दायरे में कई तेंदुए मौजूद हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि नगर के बिण, कासनी में बीते दिनों एक साथ चहलकदमी करते हुए तीन तेंदुए सीसीटीवी में कैद हुए। वहीं पांडेगांव, पपदेव क्षेत्र में आए दिन तेंदुए नजर आने की सूचना वन विभाग को मिल रही है। पुनेड़ी क्षेत्र में भी इन दिनों तेंदुए की सक्रियता से क्षेत्र के लोग दहशत में हैं। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों के लोगों का अकेले घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। वहीं वन विभाग भी तेंदुए की दहशत से निजात दिलाने में लाचार है। वन विभाग भी मानता है कि इन सभी स्थानों पर अलग-अलग तेंदुए नजर आ रहे हैं।

कनालीछीना, अस्कोट, डीडीहाट, थल, धारचूला में तेंदुए की दहशत
कनालीछीना, अस्कोट, डीडीहाट, थल, धारचूला क्षेत्र के गांवों में लंबे समय से तेंदुए की सक्रियता बनी हुई है। कनालीछीना के सतगढ़ गांव में बीते दो महीने से तेंदुए ने डेरा जमाया है। घरों से कई कुत्ते उठाकर तेंदुए उन्हें मौत के घाट उतार चुका है। अस्कोट, डीडीहाट, थल और धारचूला के गांवों में भी आए दिन तेंदुआ नजर आने से लोगों में दहशत है।
विज्ञापन


बलुवाकोट में पांच तो कूना में नजर आए चार तेंदुए
चार दिन पूर्व बलुवाकोट के पय्यापौड़ी क्षेत्र में एक साथ पांच तेंदुए नजर आने से ग्रामीणों के होश उड़ गए। समूह में मौजूद तेंदुओं ने आठ से अधिक बकरियों को भी मार डाला। वहीं गणाई गंगोली क्षेत्र के कूना में दो दिन पूर्व ग्रामीणों को तेंदुआ और तीन शावक नजर आए। दोपहर एक बजे गांव के पास पहुंचा तेंदुआ और शावक देख ग्रामीणों को घरों के भीतर कैद होना पड़ा।

सियारों की घटती संख्या भी तेंदुओं की आबादी बढ़ने का कारण
वन विभाग के मुताबिक, सियारों की घटती संख्या तेंदुओं की आबादी बढ़ने का प्रमुख कारण है। वन विभाग के मुताबिक, सियार कंदराओं और गुफाओं में जाकर तेंदुए के शावकों को मारकर भोजन के रूप में उपयोग करते हैं। सियार की संख्या घटने से तेंदुए के सभी शावकों के जीवित रहने से इनकी संख्या बढ़ रही है। खाद्य श्रृंखला प्रभावित होने से तेंदुए भी आबादी का रुख कर रहे हैं।

...........
निश्चित तौर पर तेंदुए की आबादी बढ़ रही है। सामने आया है कि दो से तीन किलोमीटर के दायरे में इनकी मौजूदगी मिल रही है। विभाग लोगों को लगातार सतर्क और जागरूक कर रहा है। आजकल झाड़ियां उगने से भी तेंदुआ आबादी के नजदीक पहुंच रहा है। -दिनेश जोशी, रेंजर, पिथौरागढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें