रामलीला प्रबंधकारिणी समिति की ओर से आयोजित आठूं पर्व का समापन हो गया है। रिमझिम बारिश की फुहारों के बीच सैकड़ों महिला, पुरुष और बच्चों ने खेलों में हिस्सा लिया। समापन पर महिलाओं ने अगले वर्ष फिर मिलने के वादे के साथ मां गौरा को विदाई दी। शाम को पितरौटा के कालसिन मंदिर में गौरा-महेश्वर की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
रामलीला मैदान में सेरा, खड़कोट, बडौली, विषाड़, पितरौटा, पदमपुर, विवेकानंद कॉलोनी, सिमलगैर बाजार, घंटाकरण आदि जगहों की महिलाओं ने हुड़के की थाप पर खेलों की शानदार प्रस्तुति दी। गंगा देवी और माया देवी ने खेलों की शुरुआत की। विण के नारायण सौराड़ी ने चंपनिया घाट न्योली झुरा रैछ और दीवानी लौंडा द्वारहाट को तिले धारू बोला गीतों से समा बांध दिया।
महिलाओं और पुरुषों ने कई फेरों में खेल-चांचरी का सुंदर प्रस्तुतीकरण किया। खेलों के बाद रामलीला समिति के कार्यकर्ताओं ने हिलजात्रा का मंचन किया। हिलजात्रा में शिव तांडव आकर्षण का केंद्र रहा। बैलों की जोड़ी, हिरन-चीतल, मछुआरों की टोली, दही वाला, घुड़सवार आदि ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
बाद में छपेली प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह महरा ने खेल दलों का आभार जताते हुए प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। इस मौके पर शिवराज सिंह अधिकारी, जगदीश प्रसाद, कमल थापा, माधवी देवी, गंगा देवी, माया देवी, कै. दीवान वल्दिया, दीपक गुप्ता, राकेश साह, सीबी जोशी, नवीन भट्ट, अनुराग बसेड़ा, मनीष धामी, प्रकाश कुमार, दीपक राणा, मनीष नगरकोटी, राजेंद्र जोशी, गिरीश पाठक, पंकज चंद समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।