सेला के पास भूस्खलन आने से जानवरों को वापस लौटाते माइग्रेशन गांव के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
दारमा घाटी के गांवों को माइग्रेशन पर जा रहे लोग सोमवार को भूस्खलन की चपेट में आ गए। लोगों ने किसी तरह भाकर अपनी जान तो बचा ली लेकिन तीन गाएं भूस्खलन की चपेट में आकर धौली नदी में समा गई। खतरे को देखते हुए लोगों ने आगे बढ़ने का इरादा फिलहाल टाल दिया है। पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबा गिर रहा है। घटना की जानकारी एसडीएम को दे दी गई है।
दारमा क्षेत्र के किसान नेत्र सिंह पुत्र कुंवर सिंह का परिवार अपने जानवरों में सामान लादकर माइग्रेशन गांव को जा रहे थे। जैसे ही उनका काफिला सेला गांव से थोड़ा आगे पहुंचा तो पहाड़ से बड़े बड़े पत्थर गिरने लगे। नेत्र सिंह ने अपने परिवार के लोगों को किसी तरह मलबे की चपेट में आने से तो बचा लिया लेकिन उनकी तीन गाएं पत्थरों और मलबे की चपेट में आकर धौली नदी में समा गई।
नेत्र सिंह ने खतरे को देखते हुए आगे बढ़ने का इरादा टाल दिया है। उन्होंने सेला गांव से फोन पर बताया कि अभी भी पहाड़ी से लगातार पत्थर गिर रहे हैं। इसमें आगे बढ़ना खतरे से खाली नहीं है। मार्छा की ग्राम प्रधान सुरती देवी, सामाजिक कार्यकर्ता छोरी देवी, महेंद्र मार्छाल एवं लक्ष्मण बनंग्याल ने उपजिलाधिकारी से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग करते हुए कहा कि सेला के पास नदी में बना पुल भी खतरनाक हालात में है तथा पुल टेढ़ा हो चुका है। यह पुल जानवरों के चलने लायक नही है। इसमें कभी भी गंभीर दुर्घटना घट सकती है। साथ ही सूचना दी कि मार्छा में भी रुकमणी देवी के घर की छतेें तोड़कर अज्ञात लोगों ने घर में रखा सामान अस्त व्यस्त कर रखा है। उन्होंने उपजिलाधिकारी से जांच करने की मांग की है।