थल के पार बाजार में स्थित तल्लीधारा के पास 1990 में भूकटाव हुआ था। इस भूकटाव ने धारे के पानी को ही समाप्त कर दिया है। बारिश और जाड़ों के सीजन में तो पानी की पतली धारा दिखती है लेकिन गर्मियों में यह पानी पूरी तरह खत्म हो जाती है। भूकटाव से पहले इस धारे में पर्याप्त पानी आता था। गर्मियों में ठंडा और जाड़ों में गर्म रहने वाले इस धारे के पानी से थल बाजार के लोगों की प्यास बुझती थी। भूकटाव के बाद प्रशासन ने पानी का स्तर कम होने के कारणों की कोई जांच नहीं की और धारे के संरक्षण का कोई उपाय नहीं किया। तल्लीधारे का पानी कम हो जाने से थल पार बाजार के लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया है। करीब पांच सौ परिवारों की प्यास बुझाने वाले इस धारे को उसके पुराने स्वरूप में लाने के लिए लोगों ने प्रयास भी किए लेकिन कोई हल नहीं निकला। लोग चाहते हैं कि जमीन के अंदर धंस चुके स्रोत को फिर से अपने स्वरूप में लाने के लिए यहां पर खुदाई की जानी चाहिए। यदि धारे का पानी जमीन के नीचे चला गया है तो भूमिगत टंकी तैयार की जाए और पानी का संरक्षण किया जाए।
ग्राम पंचायत ने काफी प्रयास किया
पूर्व प्रधान सुरेंद्र सिंह पांगती का कहना है कि ग्राम पंचायत ने धारे के संरक्षण के लिए काफी प्रयास किया। हर साल इसके संरक्षण के लिए 20 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई। वह कहते हैं कि धारे का पानी कम होना गंभीर चिंता का विषय है। इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है।
सरकारी विभागों की जिम्मेदारी तय हो
स्थानीय निवासी सतीश जोशी कहते हैं कि सरकार एक ओर तो प्राकृतिक संपदाओं के संरक्षण की बात करती है लेकिन दूसरी तरफ सूखते स्रोतों के लिए कोई योजना नहीं बनी है। वह कहते हैं कि स्रोतों के संरक्षण के लिए सरकारी विभागों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। तभी कुछ भला हो पाएगा।
स्रोत सूखना अच्छा लक्षण नहीं
बुजुर्ग प्रेमा देवी कहती हैं कि स्रोत सूखना अच्छा लक्षण नहीं है। कई वर्षों से लोगों की प्यास बुझाने वाले इस धारे का पानी कम होने से वह बेहद दुखी हैं। वह कहती है कि प्राकृतिक स्रोत के पानी का स्वाद अब लोगों को नहीं मिल पाता। पानी कैसे वापस आएगा इसके उपया तलाशे जाने चाहिए।
नई पीढ़ी कभी माफ नहीं करेगी
थल निवासी रंजना देवी का कहना है कि स्रोत सूखने के कारण सभी आहत हैं। कम से कम नई पीढ़ी तो इस दुर्दशा के लिए कभी माफ नहीं करेगी। यदि भूकटाव के तुरंत बाद ही स्रोत के संरक्षण के उपाय किए जाते तो शायद आज यह स्थिति नहीं आती। अब स्रोत का पानी वापस लौटेगा, इसमें संदेह है।