तीलू रौतेला पुरस्कार विजेता लक्ष्मी भट्ट।
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तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए चुनी गईं लक्ष्मी भट्ट का जीवन संघर्ष से भरा रहा है। गरीब कन्याओं के विवाह, गरीब परिवार की दूसरी कन्या के जन्म पर वह आर्थिक मदद करती हैं।
3 मई 1974 को लोहाघाट के खतेड़ा गांव में एक गरीब परिवार जन्मी लक्ष्मी का पाला बचपन से ही संघर्षों से पड़ा है। एक हादसे में लक्ष्मी के पिता राम दत्त की मृत्यु हो गईं थी। तीन बहनों में सबसे छोटी लक्ष्मी बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल थीं। उनकी मां ने जैसे तैसे दो बड़ी बहनों का विवाह किया। 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद लक्ष्मी ने प्राइवेट से बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई पूरी की। 1992 में उनका विवाह दहेज प्रथा के विरोधी गुरना निवासी राजेंद्र भट्ट से हुआ। वर्ष 1994 में लक्ष्मी ने महिला प्रेरणा एवं उत्थान समिति का गठन किया। तीन बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी के साथ हिंदी और समाजशास्त्र से एमए किया। बीएड की शिक्षा हासिल की।
लक्ष्मी बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को आगे बढ़ाते हुए गरीब परिवार की दूसरी कन्या और विकलांग कन्या के जन्म पर 2500 रुपये की आर्थिक सहायता देतीं हैं। अब तक 12 कन्याओं को मदद कर चुकी हैं। चार निर्धन परिवार की कन्याओं का कन्यादान स्वयं कर चुकी हैं। वह वर्ष 2014 में जिला पंचायत सदस्य चुनी गईं। उन्होंने इस दायित्व को बखूबी निभाया। वह सदन में क्षेत्र की समस्याओं को उठाने में हमेशा आगे रहीं। 15 जुलाई 2017 को घर में गैंस सिलिंडर फटने से लक्ष्मी गंभीर रूप से झुलस गईं थीं। स्वस्थ होने के बाद वह पीड़ितों की सेवा में जुटी रहीं। लक्ष्मी वर्तमान में किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य हैं।