आमथल में छह माह से बंद पड़ा पशुसेवा केंद्र
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एक तरफ सरकार पशुपालन को बढ़ावा देकर लोगों की आजीविका में सुधार लाने की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर पशुओं के इलाज और कृत्रिम गर्भाधान के लिए खोले गए पशु सेवा केंद्रों में स्टाफ न होने के कारण ताले लटक रहे हैं। यहां आमथल गांव में स्थित पशुसेवा केंद्र में छह माह से कोई कर्मचारी नहीं है। अब तक किसी अधिकारी और जनप्रतिनिधि ने यह जानकारी लेने की कोशिश नहीं की है कि आखिर यह पशुसेवा केंद्र बंद क्यों है।
आमथल के इस पशुसेवा केंद्र को घंगोली, आमथल, दड़मोली, सुनेती, रौतड़, गडेरा, बल्याऊ, कलानी, कसाड़ी, भुरोला, लेजम, कौली, खितोली, भनारकोट, चामी, कमद गांव के पशुपालकों की सुविधा के मद्देनजर खोला गया था। बताया गया कि चार साल की अवधि में इस सेवा केंद्र में सिर्फ एक दिन ही कर्मचारी आया। उस कर्मचारी ने भी तत्काल यहां से ट्रांसफर करा लिया। पशुपालकों ने बताया कि यदि जानवरों को कोई बीमारी हो जाए तो पांच किलोमीटर दूर थल जाना पड़ता है। इतनी दूर बीमार जानवर को ले जा पाना संभव नहीं होता। इसके अलावा कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा न मिलने से पशुपालकों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। इलाके में कई लोगों के पास उन्नत नस्ल के जानवर हैं, लेकिन सुविधा न मिलने से लोग खासे परेशान हैं।
इस संबंध में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. जीएस धामी ने बताया कि जिले के कई पशु सेवा केंद्रों में कर्मचारी नहीं हैं। इस कारण दिक्कत आ रही है। जुलाई में नई नियुक्तियां होंगी तो रिक्त पदों को भर दिया जाएगा। तब तक चिकित्सा सुविधा से वंचित इलाकों में सप्ताह में एक दिन पशु चिकित्सा के कैंप लगाए जाएंगे।