मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। सीमांत जिले की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद यहां के युवाओं ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। कई युवा आज भी एवरेस्ट समेत दुनिया की ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराने का सपना देख रहे हैं। ऐसे युवाओं को पर्वतारोहण और साहसिक खेलों का प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से मुनस्यारी में वर्ष 2015 में स्थापित पं. नैन सिंह सर्वेयर माउंटेनियरिंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खुद सुविधाओं और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है।
संस्थान की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रीना कौशल धर्मशक्तू के अनुसार प्रशिक्षण के लिए अभी भी कई जरूरी व्यवस्थाएं और सुविधाएं विकसित की जानी बाकी हैं। संसाधनों की कमी के कारण संस्थान में वर्ष में केवल दो बार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रशिक्षण के लिए बुनियादी सुविधाओं और ढांचे को मजबूत करने के साथ पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाए तो संस्थान देश और प्रदेश को कई प्रतिभाशाली पर्वतारोही दे सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मिले तो वे एवरेस्ट समेत दुनिया की दुर्गम चोटियों पर अभियान के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। इससे सीमांत क्षेत्र के युवाओं को रोजगार और साहसिक खेलों के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर भी मिलेंगे।
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500 से अधिक युवाओं को दिया प्रशिक्षण
मुनस्यारी में स्थापित इस संस्थान से अब तक 500 से अधिक युवाओं को पर्वतारोहण का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। संस्थान की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रीना कौशल धर्मशक्तू स्वयं भी पर्वतारोहण और साहसिक खेलों से जुड़ी हैं। वह सात बार माउंट एवरेस्ट फतह कर चुके प्रसिद्ध पर्वतारोही लवराज सिंह धर्मशक्तू की पत्नी हैं। रीना कौशल धर्मशक्तू अंटार्कटिका के दक्षिणी ध्रुव पर स्कीइंग करने वाली पहली भारतीय महिला होने का रिकॉर्ड भी बना चुकी हैं।
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पं. नैन सिंह सर्वेयर माउंटेनयरिंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट स्थापित करने का उद्देश्य इसे भारतीय पर्वतारोहण संस्थान दिल्ली से संबद्ध कर बड़े पैमाने बेहतरीन पर्वतारोही तैयार करना था। वर्तमान में इस संस्थान की अनदेखी की जा रही है। सरकार को जल्द संस्थान का विस्तार कर इसके लिए जरूरी सुविधाएं और संसाधन जुटाने चाहिए। -हरीश धामी, विधायक, धारचूला