दिनेश अवस्थी (संवाद), पिथौरागढ़। कोरोना वायरस के चलते विश्व प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष अब संभव नहीं है। विदेश मंत्रालय की कैलाश यात्रा को संचालित करने वाली एजेंसी कुमाऊं मंडल विकास निगम के अधिकारियों के साथ न तो कोई बैठक हुई और न ही किसी तरह के दिशा निर्देश जारी हुए हैं। कुमाऊं के लिपुलेख दर्रे से वर्ष 1981 में कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरु की गई। उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फ पिघलने के बाद प्रतिवर्ष जून में यात्रा शुरू हो जाती है। 18 दलों में विभिन्न राज्यों के करीब एक हजार यात्री भगवान भोलेनाथ की नगरी कैलाश की यात्रा करते हैं। यात्रा को लेकर मध्य फरवरी से ही बैठकों का दौर शुरू हो जाता है। इस वर्ष कोरोना के चलते कोई बैठक नहीं हुई। मई शुरू हो गया है। अभी तक विदेश मंत्रालय ने यात्रा को लेकर निगम अधिकारियों से कोई वार्ता नहीं की है। केएमवीएन के जीएम अशोक जोशी का कहना है कि यात्रा अब कैसे संभव हो सकती है। यात्रा होगी या नहीं इस बारे में कोई निर्देश अब तक नहीं मिले हैं। बता दें कि केएमवीएन दिल्ली से यात्रा के संचालन के साथ ही यात्रियों के रहने और भोजन की व्यवस्था भी करता है। मार्च-अप्रैल में निगम के आवास गृहों की मरम्मत, सुधारीकरण का कार्य शुरु हो जाता है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में प्रशासन खराब रास्तों को ठीक करवाता है। इस बार कोरोना के चलते कुछ भी नहीं हो पाया है। ऐसे में मानसरोवर के साथ ही भारत-चीन व्यापार, आदि कैलाश यात्रा भी स्थगित होने के पूरे आसार हैं।