पिथौरागढ़। 15 वें राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन के अंतिम दिन सोमवार को उत्तराखंड में कुमाऊंनी भाषा संस्थान की स्थापना संबंधी प्रस्ताव पारित किए गए। इस मौके पर कुमाऊंनी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का भी प्रस्ताव पास किया गया।
उत्तराखंड भाषा संस्थान और पहरू पत्रिका की ओर से आयोजित सम्मेलन में मुख्य अतिथि पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि किसी भी स्थान की लोकभाषा वहां की पहचान होती है। कहा कि जन आंदोलन के रूप में कुमाऊंनी भाषा को आगे बढ़ाया जाएगा।
संयोजक डॉ. अशोक पंत ने बताया कि सम्मेलन में विद्यालयी शिक्षा में कुमाऊंनी भाषा को शामिल करने, कुमाऊंनी भाषा संस्थान की स्थापना कर कुमाऊंनी भाषा लेखन पुरस्कार योजना शुरू करने, प्रदेश में होने वाली आयोग की परीक्षा में कुमाऊंनी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने के प्रस्ताव तैयार किए गए।
इसके अलावा विद्यालयों में संगीत विषय में कुमाऊंनी बैठकी होली, लोकगीत और उनकी सर लिपि भी पाठ्यक्रम में शामिल करने, कला विषय में रंगोली, ऐपण और लोक कला के चित्रण को शामिल करने के प्रस्ताव पास किए गए।
सम्मेलन में कुमाऊंनी भाषा और संस्कृति से नई पीढ़ी को कैसे जोड़ा जाए विषय पर व्याख्यान आयोजित किए गए। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को भी सम्मानित किया गया।
यहां संरक्षक डॉ. हयात सिंह रावत, देव सिंह पिलख्वाल, प्रो. नरेंद्र भंडारी, पूर्व प्राचार्य एलएल वर्मा, हेमराज बिष्ट, धर्म सिंह रावत, महेश पुनेठा, चिंतामणि जोशी, डॉ. सरोज वर्मा, डॉ. पीतांबर अवस्थी, मुकेश पंत, दिनेश भट्ट, जयमाला देवलाल मौजूद रहे।
हेमराज बिष्ट को किया सम्मानित
पिथौरागढ़। 15 वें राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन में पिथौरागढ़ के प्रसिद्ध रंगकर्मी हेमराज बिष्ट को दिलीप सिंह खेतवाल स्मृति कर्म वीर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हेमराज को यह पुरस्कार प्रदान किए जाने पर जिले के रंगकर्मियों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खुशी व्यक्त की है। संवाद