दिल्ली हाट में जय मां काली मुनस्यारी जनजाति हाऊस के स्टॉल से खरीदारी करते लोग।
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थल (पिथौरागढ़)। दिल्ली हाट में एक से 15 फरवरी तक चल रहे आदि महोत्सव में हाथ से बनी जय मां काली मुनस्यारी जनजाति हाउस के ऊनी और अंगोरा ऊन की शॉल, पंखी, पशमीना, स्वेटर, टोपी, वास्कट, मफलर की खूब बिक्री हो रही है। इसके साथ ही बिच्छू घास, बुरांश, तुलसी, रोजमेरी, लेमनग्रास की हर्बल चाय लोगों की खूब पसंद आ रही है। दिल्ली हाट में 101 नंबर पर लगे स्टाल में जड़ी बूटियों में गंद्रायन, जंबू, थोया, छीपी, तिमूर, बालछड़ी, लालजड़ी, कूट, कटकी के साथ जोहार की प्रसिद्ध राजमा भी खूब बिक रही है।
जलथ गांव के समूह की चंद्रा देवी, अनीता देवी, चंपा पांगती, गुड्डी ने बताया इनके स्टाल में लोग जड़ी बूटी के साथ परंपरागत हथकरघा की बनी ऊनी कपड़ों को खरीद रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे उनके धरोहर रूपी उत्पादों को दिल्ली हाट में नई पहचान मिल रही है। दिल्ली पर्यटन विभाग विभाग से 30 राज्यों और छह केंद्र शासित प्रदेशों के दो सौ स्टाल लगाए गए हैं। इनमें एक हजार से ज्यादा शिल्पकार शामिल हैं। मुनस्यारी जनजाति हाउस दल के मुखिया ईश्वर सिंह ने बताया कि उनके उत्पाद को नई पहचान मिलने से समूह के लोग काफी उत्साहित है। इस आदि महोत्सव का शुभारंभ एक फरवरी को उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने किया था।