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खलियाटाप पहुंचे देश-विदेश के बर्ड वाचर

Fri, 01 Jan 2016 10:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,दीपक उप्रेती /पिथौरागढ़
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करीब 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खलियाटाप में इन दिनों बर्ड वाचरों की चहलकदमी बढ़ी है। इतनी ऊंचाई पर इन दिनों दुर्लभ प्रजाति के पक्षी नजर आ रहे हैं। मोनाल इनमें मुख्य है। मोनाल को राज्य पक्षी का दर्जा मिला है। मोनाल की नर और मादा प्रजातियां अक्सर खलिटाप की वादियों में दिख जाती हैं। मोनाल के अलावा स्नो क्रो, स्नो पाटरिग, स्टायर ट्रेगोपान पक्षी भी यहां अक्सर नजर आ जाते हैं। खलियाटाप में बर्ड वाचरों की गतिविधि पहली बार बढ़ी है। अभी कुछ और वाचर यहां पहुंचने वाले हैं। बर्ड वाचर पक्षियों के फोटो अपने कैमरों में कैद कर रहे हैं। वह सुबह से ही बुग्यालों का रुख करते हैं। हर पक्षी की गतिविधि, उनके व्यवहार का गहराई से अध्ययन हो रहा है। नोएडा से आए मनोज अग्रवाल ने बताया कि वह 22 वर्ष से बर्ड वाचिंग कर रहे हैं। मुनस्यारी और खलियाटाप का यह इलाका बर्ड वाचिंग के लिए काफी आसान है। कम क्षेत्र में ही कई पक्षी नजर आ जाते हैं।
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हालैंड से आए मार्क हाउड ने मोनाल पक्षी के कई एंगल से फोटो खींचे। वह दो दिनों से इस इलाके में पक्षियों पर अध्ययन कर रहे हैं। मार्क पक्षी विशेषज्ञ हैं। देहरादून से आए गुंजन अरोड़ा ने खलियाटाप में विशेष रूप से स्नो क्रो के फोटो को अपने कैमरे में कैद किया। सफेद रंग का यह पक्षी ठंडे मौसम में ही नजर आता है। वह कहते हैं कि खलियाटाप को बर्ड वाचर स्पाट के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। यह पर्यटन की दृष्टि से भी फायदेमंद होगा।

पहली बार पहुंचे बर्ड वाचर
खलियाटाप में बर्ड वाचर टूर को लाने वाले सुरेंद्र पंवार और राजेश पंवार का कहना है कि पहली बार बर्ड वाचरों की ओर से जिस तरह का रिस्पांस मिला है, उससे लगता है कि आने वाले समय में यहां पर बर्ड वाचरों की संख्या बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि जल्दी ही बर्ड वाचरों का बड़ा दल यहां आएगा।
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आग की घटना पक्षियों के लिए घातक
 युवा प्रकृतिप्रेमी सुरेंद्र पंवार का कहना है कि इन दिनों हिमालयी बुग्यालों में शिकार के लिए कुछ लोग आग लगा देते हैं। आग से जंगली जानवरों के साथ साथ पक्षियों को भी खतरा होता है। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले पक्षी ज्यादा उड़ान नहीं भर सकते। इस कारण उनको खतरा ज्यादा रहता है।
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