3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खलियाटॉप में स्नो स्कीइंग का प्रशिक्षण कराने पहुंचे प्रशिक्षकों में इस बात से भारी निराशा है कि खलियाटॉप में एक फीट से कम बर्फ रह गई है। यदि जल्दी हिमपात नहीं होता तो खलियाटॉप में दूसरे बैच का स्कीइंग प्रशिक्षण करा पाना संभव नहीं होगा। खलियाटॉप में पिछले साल तक इतनी बर्फ गिर जाती थी कि मार्च में भी स्कीइंग का प्रशिक्षण आसानी से हो गया था।
स्कीइंग प्रशिक्षक सुरेंद्र पंवार और बासु पांडे ने बताया कि स्कीइंग के लिए कम से कम दस से 12 इंच बर्फ होनी जरूरी है। पिछले कुछ दिनों से मौसम शुष्क बना हुआ है। इस कारण बर्फ तेजी से पिघल रही है। यदि जल्दी हिमपात नहीं होता तो एक हफ्ते में खलियाटॉप की बर्फ भी पिघल जाएगी और उसमें नए बैच का प्रशिक्षण कार्यक्रम चला पाना संभव नहीं होगा। मंगलवार को भी खलियाटॉप में स्कीइंग का प्रशिक्षण जारी रहा। 35 युवाओं ने बर्फ में बैलेंस बनाने के तरीके सीखे। युवाओं ने कुछ दूर तक बर्फ में स्केटिंग भी की। प्रशिक्षकों ने बताया कि पिछले साल तक खलियाटॉप में बर्फ निचले ढलानों में ही मिल जाती थी लेकिन इस बार प्रशिक्षण के लिए टॉप पर जाना पड़ रहा है।
इधर, स्कीइंग का प्रशिक्षण ले रहे युवाओं में खासा उत्साह है। अभी बर्फ की मात्रा इतनी तो है ही कि उसमें स्कीइंग की जा सके। प्रशिक्षण में स्थानीय प्रशिक्षक लक्ष्मण राम और खुशाल राम भी सहयोग दे रहे हैं। जिले के विभिन्न हिस्सों से नौजवान प्रशिक्षण के लिए पहुंचे हैं। पहले चरण का प्रशिक्षण सात फरवरी को संपन्न हो जाएगा। उसके बाद मौसम की स्थिति के अनुसार अगले बैच के प्रशिक्षण की तैयारी की जाएगी।