पिथौरागढ़। सीमांत जिले में अब क्लस्टर के तहत कीवी का उत्पादन किया जाएगा। इससे जहां काश्तकारों की आय में वृद्धि होगी, वहीं आजीविका संवर्द्धन भी होगा।
जिले के विण, कनालीछीना, मुनस्यारी विकासखंडों में कीवी का अच्छा उत्पादन हो रहा है। मुनस्यारी के गिरगांव में काश्तकार भगत सिंह बाछमी ने इस वर्ष तीन क्विंटल कीवी का उत्पादन किया है।
डीआरडीए के परियोजना अधिकारी आशीष पुनेठा ने बताया कि काश्तकारों की मांग पर 300 कीवी स्टैंड (टी बार सिस्टम) के लिए एमबीएडीपी के तहत जय मां लक्ष्मी ग्राम संगठन को 7.50 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। ग्राम संगठन ने काश्तकारों को वार्षिक किराए पर कीवी स्टैंड उपलब्ध कराए।
इससे ग्राम संगठन को तीन साल में 27,000 रुपये की आय हुई। बताया कि ग्राम समूह की महिलाओं ने दैनिक मानदेय के आधार पर काश्तकारों के साथ कीवी उत्पादन किया। इससे महिलाओं को तीन साल के दौरान 55,000 रुपये पारिश्रामिक के रूप में प्राप्त हुए हैं।
काश्तकार बाछमी ने इस वर्ष तीन क्विंटल कीवी का उत्पादन किया, जिसे स्थानीय बाजार में 250 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा गया। उन्होंने कुल 75,000 रुपये का व्यवसाय किया। कीवी के सफल उत्पादन पर प्रशासन के हौंसले भी बढ़े हुए हैं।
डीएम विनोद गोस्वामी ने कीवी उत्पादन के कार्य को क्लस्टर के आधार पर अधिक विकसित करने के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देश पर अब संबंधित योजनाओं के तहत कीवी उत्पादन को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। सीडीओ डॉ. दीपक सैनी ने बताया कि उत्पादन के कार्यों को बढ़ाया जाएगा, ताकि समूहों की भागीदारी बढ़ाते हुए आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।