गंगोलीहाट की रामलीला में रावण-कुंभकरण संवाद
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पिथौरागढ़ की सदर एवं टकाना की रामलीला में कुंभकरण, मेघनाद और रावण का वध हो गया है। गंगोलीहाट, थल, मुनस्यारी में रामलीला जारी है। जिला मुख्यालय के नजदीक वड्डा में रामलीला शुरू हो गई है। अस्कोट में 16 अक्तूबर से रामलीला होगी।
जिला मुख्यालय की रामलीला में लक्ष्मण के मूर्छा से जागने की सूचना पर लंका में खलबली मच जाती है। लंकेश रावण कुंभकरण को निद्रा से जगाता है। युद्ध छिड़ने की जानकारी मिलने पर कुंभकरण राम से बैर लेने को गलत बताते हुए रावण से कहता है-भल न कीन्ह तैं निसिचर नाहा। इसके पश्चात युद्ध क्षेत्र में कुंभकरण की मुलाकात विभीषण से होती है। विभीषण रावण के अत्याचारों की जानकारी कुंभकरण को देता है। कुंभकरण विभीषण के कदम की सराहना करता है। भीषण युद्ध के बाद भगवान राम के हाथों कुंभकरण मारा जाता है। इसके पश्चात मेघनाद युद्ध के मैदान में आता है। लक्ष्मण के हाथों मेघनाद भी वीरगति को प्राप्त हो जाता है। मेघनाद की पत्नी सुलोचना सती हो जाती है। भगवान राम के हाथों रावण मारा जाता है। देर रात रावण, मेघनाद के पुतले का दहन किया गया।
गंगोलीहाट में लक्ष्मण शक्ति से कुंभकरण वध तक की लीला का मंचन किया गया। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष आरपी साह, शंकर सिंह रावल, किशन उप्रेती, कल्याण सिंह धानिक, षष्टी रावल, चंद्रशेखर पंत ने रामलीला संचालन में सहयोग के लिए सभी का आभार जताया। थल की रामलीला में कुंभकरण, मेघनाद, रावण का वध हो गया है। वड्डा में पहले दिन नटी-सूत्रधार नाटक के साथ ही रावण, कुंभकरण, विभीषण की तपस्या, रावण के कैलाश पर्वत उठाने और राम-सीता जन्म का मंचन किया गया। मुनस्यारी की रामलीला में राम वनवास के दृश्यों का मंचन किया गया। कमेटी के अध्यक्ष रवि बृजवाल ने बताया कि रामलीला का समापन 16 अक्तूबर को होगा। समापन पर लक्की ड्रा खोला जाएगा। रामलीला संचालन में महासचिव मुन्ना सयाना, मोहन सिंह रावत, खुशाल सिंह धर्मशक्तू सहयोग कर रहे हैं।