खोतिला में भूस्खलन की चपेट में आ रहे पेड़
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धारचूला नगर से 800 मीटर की दूरी पर स्थित खोतिला कस्बा लगातार खतरे से घिरता जा रहा है। यहां भूस्खलन का दायरा बढ़ता जा रहा है। इस कारण पिथौरागढ़-तवाघाट हाइवे के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। हालात इतने विकट हो चुके हैं कि दो दिन पहले मरम्मत की गई पेयजल लाइन फिर से भूस्खलन की भेंट चढ़ गई है। खोतिला में पेयजल संकट फिर से शुरू हो गया है। भूस्खलन का नया क्रम बुधवार रात से शुरू हुआ। कुछ घरों के ऊपर की पहाड़ी पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। कुछ स्थानों पर दरार 12 फीट से ज्यादा चौड़ी हो गई है। यह दरार लगातार खिसक रही है। पूरा मल्ला खोतिला में धूल भरी हवाओं के कारण खेत और पेड़ों में धूल लगी है। सैकड़ों पेड़ भूस्खलन की चपेट में आकर गिरने लगे हैं।
भूस्खलन के कारण काली नदी का रुख लगातार नेपाल की ओर मुड़ता जा रहा है। महाकाली में लगातार मलबा गिरने से पानी का बहाव रुकने लगा है। बता दें कि विगत दिनों हुए भूस्खलन में खोतिला से धारचूला को जोड़ने वाला मुख्य पैदल मार्ग ध्वस्त हो गया था, इस कारण खोतिला व्यांस नगर के ग्रामीणों और छोटे बच्चों को धारचूला से 4 किमी दूर टीवी टावर से घूमकर धारचूला आना पड़ रहा है। विगत दिनों पेयजल सचिव अरविंद ह्यांकी ने धारचूला का दौरा कर लोक निर्माण विभाग को शीघ्र रास्ता बनाने का निर्देश दिया था, लेकिन भूस्खलन का बढ़ता दायरा रास्ता बनने में रोड़ा बना हुआ है।
फिलहाल लोनिवि ने खोतिला जाने के लिए टीवी टावर के पास से चार किलोमीटर पैदल मार्ग बनाना शुरू कर दिया है। क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय गर्ब्याल एवं युवा संगठन के अध्यक्ष कृष्ण नपलच्याल ने मार्ग नहीं बनने तक टीवी टावर से धारचूला तक अस्थायी रूप से वाहन लगाने की मांग की है। फिलहाल प्रशासन के पास भूस्खलन की रोकथाम की कोई योजना नहीं है। नतीजतन खोतिला कस्बा पूरी तरह खतरे में आ गया है।