जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान गोपेश्वर (चमोली) की पादप विकास कार्यशाला में सामने आया कि उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में कश्मीरी अखरोट और बेहतर क्वालिटी के सेब पैदा होने लगे हें।
धारचूला के नाभी जनमिलन केंद्र में एसडीएम एके पांडे की अध्यक्षता में हुई कार्यशाला में संस्था के वैज्ञानिक डा. विजय भट्ट ने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में जड़ी-बूटी के साथ ही अखरोट और सेब उत्पादन की अपार संभावना है। संस्था पिछले कई सालों से उच्च हिमालयी क्षेत्र में जड़ीबूटी विकास और फल उत्पादन पर काम कर रही है। नाभी, बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू आदि गांवों में चिरायता, कुटकी, सालमपंजा, जंबू, गंदरेंणी का प्रचुर मात्रा में उत्पादन हो रहा है। नाभी में कश्मीरी प्रजाति के कागजी अखरोट, बादाम का उत्पादन शुरू हो गया है। नाभी, बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू गांवों में सेब के पेड़ फल देने लगे हैं।
चमोली के जिला जज यूएस नबियाल ने जड़ी-बूटी और फल उत्पादन को प्रोत्साहन देने की सराहना करते हुए कहा कि चमोली में भी लोग जड़ीबूटी से अच्छी आमदनी कर रहे हैं। जड़ीबूटी से लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है, इसको प्रोत्साहन देने के लिए और अधिक प्रयास किए जाने चाहिए। हनुमान सिंह नबियाल, रं कल्याण संस्था के अध्यक्ष अशोक नबियाल, प्रधान सुमन नबियाल, अमर यरसों, नरेंद्र नपलच्याल, पदम सिंह सोनाल ने संस्था के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इससे उच्च हिमालयी क्षेत्र के लोगों की आजीविका बढ़ेगी।