कनार के भगवती मंदिर में बृहस्पतिवार की रात सैकड़ों लोगों ने रात्रि जागरण किया। देवी की स्तुति में चांचरी गीत भी गाए। हर व्यक्ति किसी न किसी मनोकामना को लेकर मंदिर में पहुंचा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार मंदिर में आठ हजार से ज्यादा लोग पहुंचे। नौ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित कनार के भगवती मंदिर में हर साल मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन मेला लगता है। लोग देवी की आराधना करते हैं और रातभर भजन कीर्तन गाते हैं।
शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में लोगों ने देवी का आशीर्वाद लिया। मुनस्यारी, धारचूला, बरम, बंगापानी, मदकोट, सेराघाट समेत आसपास के गांवों को लोगों की वापसी होने लगी है। कनार मंदिर जाने के लिए पय्यापौड़ी से 15 किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता है। मंदिर में आज सुबह बरपानी स्रोत से पानी का लाकर मंदिर में अभिषेक किया गया। उसके बाद इसी पवित्र पानी को हर गांव के मुखिया को बांटा गया। कनार में आज सुबह हाड़ कंपाने वाली ठंड थी लेकिन लोगों की आस्था के सामने इस ठंड का लोगों को कोई अहसास तक नहीं हुआ। मंदिर में पहुंचे सभी लोगों के भोजन और आवास की व्यवस्था कनार गांव के लोगों ने की।
पहले मुख्यमंत्री के आने का कार्यक्रम था
30 नवंबर को जब मुख्यमंत्री हरीश रावत मुनस्यारी के दौरे पर आए थे तब उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया था कि वह इस बार कनार मेले में जरूर आएंगे। ऐन वक्त पर मुख्यमंत्री का कार्यक्रम बदल गया। यदि मुख्यमंत्री कनार आते तो भीड़ और बढ़ जाती। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री को एक बार कनार जैसे दुर्गम इलाके का जरूर दौरा करना चाहिए।