बंगापानी तहसील के कनार मेले में दमाऊ बजाते लोग।
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। बंगापानी तहसील क्षेत्र के कनार गांव में समुद्र तल से छह हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित कोकिला मंदिर में एक दिनी रात्रिकालीन मेले में आस्था का सैलाब उमड़ा। मेले में श्रद्धालुओं ने मां कोकिला के दर्शन कर सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। हालांकि कोरोना का कारण इस बार नेपाल के लोग मेले में शामिल नहीं हो सके। मेले में कनार के सबसे बड़े दमाऊ का प्रदर्शन भी किया गया।
प्रसिद्ध मां कोकिला के मुख्य मेले में सोमवार दोपहर से ही भीड़ जुटनीं शुरू हो गई थी। मेले में धारचूला, जाराजिबली, अस्कोट, मेतली, गोगई, तोली, चामी, बलुवाकोट आदि क्षेत्रों के लोगों ने मां कोकिला की पूजा, अर्चना कर सुखी और समृद्ध जीवन की मन्नत मांगी। देर शाम पारंपरिक तरीके से विभिन्न गांवों की जातें ढोल-नगाड़ों की थाप पर मुख्य मंदिर से मलौरा रवाना हुई। स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य के साथ देवी मां के डोले को विदा किया। देवी मां का डोला लगभग चार किमी दूर मलौरा तक पहुंचाया गया। इस दौरान अवतरित देवस्वरूप पुजारी महेंद्र सिंह परिहार ने श्रद्धालुओं को समृद्ध जीवन के लिए आशीर्वाद दिया। मंदिर के प्रांगण में रातभर धूनी जलती रही। पंडित दिनेश अवस्थी ने सभी अनुष्ठान कराए। मंदिर समिति के महेंद्र सिंह ने सभी लोगों का आभार जताया।
पांच साल से बंद है पशु बलि
अस्कोट (पिथौरागढ़)। पूर्व में कोकिला मां के मंदिर में मेले के दौरान पशु बलि दी जाती थी। पशु बलि देने की प्रथा पांच साल से बंद है। स्थानीय लोग और प्रशासन की पहल के बाद वर्ष 2015 में बलि प्रथा बंद कर दी गई। पहले यहां पर सैकड़ों की संख्या में बकरों की बलि दी जाती थी।