पिथौरागढ़ दुग्ध संघ की ओर से पैकिंग में उपलब्ध कनार का घी। स्रोत: दुग्ध संघ
पिथौरागढ़। सीमांत जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांव कनार का प्रसिद्ध घी अब लोगों को सेहतमंद रखेगा। भरपूर पौष्टिकता से भरे घी को दुग्ध संघ ने बाजार में बिक्री के लिए उतार दिया है। बंगापानी तहसील के बरम क्षेत्र का गांव कनार छिपलाकेदार की तलहटी पर बसा है। यह क्षेत्र जैव विविधता और जड़ी-बूटी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
कनार का घी पहले काफी प्रसिद्ध था। 1990 तक यहां का घी अन्य जगहों पर टीन में भरकर घोड़ों के माध्यम से पहुंचाया जाता था। अभी भी डीडीहाट और धारचूला के कई क्षेत्रों में कनार के घी का ही प्रयोग होता है। अब दुग्ध संघ ने कनार के घी को बढ़ावा देने के लिए आंचल कनार घी नाम से इसे बाजार में उतारा है। दुग्ध संघ के प्रबंधक हरीश आर्या ने बताया कि दिसंबर में 150 किलो घी की बिक्री की गई है। ग्रामीणों से घी 700 रुपये प्रति किलो खरीदा जा रहा है। बाद में इसे शुद्ध और पैकिंग कर 950 रुपये में एजेंट को उपलब्ध कराया जा रहा है। उपभोक्ताओं को एक हजार रुपये प्रति किलो की दर से यह बेचा जा रहा है। आर्या ने बताया कि कनार गांव की गाय उच्च हिमालयी क्षेत्र में घास के साथ जड़ी-बूटी और अन्य औषधियां भी खाती हैं। इस वजह से यहां का घी काफी पौष्टिक माना जाता है। यह घी दिखने में काले रंग का होता है। आंचल का सामान्य घी 700 रुपये किलो की दर से बेचा जा रहा है।
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पिथौरागढ़ में बढ़ा दूध का उत्पादन
पिथौरागढ़। जिले में इस वर्ष दूध का उत्पादन पिछले साल की अपेक्षा 14 प्रतिशत अधिक हुआ है। दुग्ध संघ की 211 समितियों से 9918 सदस्य दूध उत्पादन से जुड़े हैं। दुग्ध संघ प्रबंधक हरीश चंद्र आर्या ने बताया कि पिछले साल दिसंबर में 5167 जबकि इस वर्ष 5895 लीटर दूध का उत्पादन हुआ। अधिकांश दूध चंडाक और झूलाघाट क्षेत्र से आ रहा है। जिले में पांच हजार लीटर दूध की रोज की खपत है। बाकी दूध खटीमा दुग्ध संघ को भेजा जा रहा है। संवाद