अद्भुत, अलौकिक, अतुलनीय। कैलाश मानसरोवर की यात्रा के बाद उनकी जुबां पर बस यही तीन शब्द हैं। इन शब्दों के साथ उनके जेहन में भोले (कैलाश) की याद है। दरअसल कैलाश मानसरोवर की यात्रा के अद्भुत नजारों ने न केवल उनमें आध्यात्मिकता को ताकत दी, बल्कि एकदम नजदीक से कैलाश के दर्शन ने उन्हें इतना भावुक कर दिया कि उनकी आंखों से आंसू छलक आए। ये पहला दल था जिसे प्रतिबंधित चरण स्पर्श नामक जगह पर जाकर कैलाश के दर्शन करने का सौभाग्य मिला और ये अवसर चेन्नई की मूल निवासी जयंथी मणि और उनके देहरादून में तैनात अफसर पति की बदौलत मिला, जिनके प्रयास से चीनी अधिकारियों ने इस 17वें दल को चरण स्पर्श स्थल तक जाने की अनुमति मिल सकी। शायद दोकलम विवाद सुलझने और पीएम नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा के चलते भी चीनी अधिकारियों ने दरियादिली दिखाई।
14 अगस्त को मालपा में आई तबाही के बाद हेलीकॉप्टर से 16वें एवं 17वें दल को धारचूला से बूंदी और बूंदी से धारचूला तक एयर लिफ्ट किया गया। पिथौरागढ़ पर्यटक आवास गृह में अमर उजाला से खास बात करते हुए जयंथी मणि ने बताया कि मानसरोवर के नजदीक पहुंचने पर पहले दिन 11 किलोमीटर की परिक्रमा की। ये पूरा परिक्रमा स्थल समतल था। यहां से करीब 2.5 किमी दूर चरण स्पर्श नामक जगह पर जाने के लिए किए अनुरोध को चीनी अधिकारियों ने मान लिया। इसके बाद वे चरण स्पर्श पहुंचे। इससे पहले चरण स्पर्श पहुंचने पर पोनी-पोर्टर को ले जाने की भी अनुमति थी।
दोकलम विवाद सुलझने के बाद यही यात्रा दल इस स्थान पर जा सका। चरण स्पर्श में पहुंचने पर लगातार बारिश और बर्फबारी हो रही थी। ज्यों ही यात्रा दल में शामिल महिलाएं पहुंचीं, बादल छंटने लगे और कैलाश पर्वत एकदम साफ नजर आया। ऐसा लगा मानो कैलाश पर्वत को वे छू लेंगे। इस नजारे को देख सभी यात्रियों की आंखों से आंसू छलक आए। यात्रा दल इस जगह पर रात 8 बजे तक रुका। जयंथी मणि बताती हैं कि चीन के इस हिस्से पर रात 9 बजे (भारतीय समयानुसार) तक धूप रहती है। कोहरा छंटने से यात्रा दल को ओम पर्वत के भव्य दर्शन हुए। बताते हैं कि वे सौभाग्यशाली थे कि पांच यात्रा दलों के बाद ओम पर्वत को इतनी स्पष्टता से देख सके।
उन्होंने बताया कि यात्रा की अनुभूतियों ने उनकी थकान को हर लिया है। यहां जंगल, पहाड़ी, जलवायु से लेकर लोग सब कुछ अद्भुत था। चुनौतियां भी थीं, मगर शिव का नाम और बुलंद हौसलों ने हर बाधा को पार लगाया। यात्रा के हर कदम पर सचमुच शिव का अहसास था। ये यात्रा उनके लिए साक्षात भगवान महादेव से साक्षात्कार था। यात्रा दल के सदस्य कुमाऊं मंडल विकास निगम की व्यवस्थाओं से अभिभूत थे। महज 35 हजार रुपये में निगम ने दिल्ली से कैलाश मानसरोवर यात्रा की लौटा-फेरी से लेकर आवास एवं भोजन की उम्दा व्यवस्था की थी। टीआरसी के प्रबंधक दिनेश गुरुरानी ने बताया कि उनके विशेष आग्रह पर यात्री दल को पिथौरागढ़ से होते हुए दन्यां के लिए रवाना किया गया। वैसे ये दल धारचूला से सीधे दन्यां रवाना होना था। पिथौरागढ़ में उन्हें पर्यावरणीय संरक्षण की शपथ दिलाई गई।