कैलास मानसरोवर की यात्रा पूरी कर लौट रहे प्रथम दल के 55 यात्रियों को सड़कें बंद होने के कारण भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। शेड्यूल के अनुसार शनिवार को यात्रियों को दिल्ली पहुंचना था, लेकिन यात्री अब भी डीडीहाट में फंसे हैं। यात्री बृहस्पतिवार को आधार शिविर धारचूला आ गए थे। सड़क बंद होने के कारण वह धारचूला में ही रुक गए। शनिवार दोपहर बाद सड़क खुलते ही यात्रियों को डीडीहाट लाया गया। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार वापसी में यात्रियों को दोपहर भोजन के लिए पिथौरागढ़ जाना पड़ता है, लेकिन यह शेड्यूल पूरी तरह पलट गया। यात्रियों का दल अपरान्ह 5.30 बजे डीडीहाट पहुंचा। डीडीहाट से थल होकर अल्मोड़ा जाने वाली रोड बंद होने से यात्रियों को शनिवार को डीडीहाट में ही रोका गया है।
यात्रा पूरी कर लौट रहे यूपी के विशाल गुप्ता ने कहा कि तिब्बत और उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम बेहद सुहावना मिला, लेकिन नीचे उतरते ही मौसम के कारण दिक्कत शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि लिपुलेख दर्रा पार कर तिब्बत में प्रवेश करते ही चौड़ी सड़कें मिलती हैं, जबकि भारतीय क्षेत्र में शनिवार को भी 80 किलोमीटर का सफर पैदल करना पड़ता है। राजस्थान निवासी कपिल बिरला ने कहा कि कैलास मानसरोवर क्षेत्र में पीने का पानी सही नहीं मिलता। उनको बोतल बंद पानी खरीदकर काम चलाना पड़ा। रानीखेत उत्तराखंड निवासी दीपांशु पंत ने कहा कि अब एक खुशी की बात है कि मानसरोवर झील में प्रदूषण नहीं है। कर्नाटक के तरुण ने कहा कि तिब्बत में भोजन सही नहीं मिलता। दिल्ली की यात्री रचिता और उनके पति चेतन ने कहा कि तिब्बत में अब यात्रियों के लिए कुछ सुविधाएं बढ़ने लगी हैं।
सभी यात्री तिब्बत में हो रहे विकास से बेहद प्रभावित हैं। चीन सरकार ने अधिकृत तिब्बत पर ज्यादा ध्यान दिया है। वहां सड़क और संचार की बेहतरीन सुविधाएं हैं। यात्रियों ने कहा कि यदि आईटीबीपी और कुमाऊं मंडल विकास निगम यात्रा संचालन में मदद न करे तो इतनी कठिन यात्रा को पूरा कर पाना संभव नहीं होगा। कई यात्री रोड बंद होने से खासे परेशान हैं। यदि रविवार तक डीडीहाट से अल्मोड़ा जाने वाली सड़क खुल जाती है तो यात्री यहां से आगे के लिए रवाना हो जाएंगे। इससे पहले यात्रियों का आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मुख्यालय में सेनानी महेंद्र प्रताप समेत अन्य अफसरों ने स्वागत किया। डीडीहाट पर्यटक आवासगृह में प्रबंधक आनंद आर्या यात्रियों की व्यवस्था में लगे हैं।