बलुवाकोट के जंगल में लगी आग बुझाते लोग
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कड़ाके की ठंड में भी पहाड़ के जंगल सुलग रहे हैं। ग्राम सभा बलुवाकोट के जंगलों में एक सप्ताह से लगी आग से अब तक 500 एकड़ जंगल जल चुका है। आग लगने का कारण जंगलों में सूखी घास को जलाना बताया जा रहा है। एक ओर बारिश न होने के कारण पहाड़ पर सूखे के हालात पैदा हो गए हैं, वहीं लोग जंगलों में आग लगाकर वन संपदा को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
नगतड़ के सरपंच रमेश ठगुन्ना ने बताया कि मंगलवार दोपहर बलुवाकोट के जंगलों में लगी आग को बुझाने में परिवर्तन संगठन, कृषक क्लब के सदस्यों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। चार घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। उन्होंने बताया कि पहाड़ की चोटी पर लगी आग की लपटें 20 फुट ऊंची थी। इस कारण पहाड़ की चोटी पर लगी आग को नहीं बुझाया जा सका। उन्होंने बताया कि बलुवाकोट के साथ ही पोखरी, लेक, पचकांडा, नगतड़ के जंगलों में शाम के समय आग लगाकर सूखी घास को जलाया जा रहा है। क्षेत्र के जंगलों में लगाई जा रही आग से छोटे पौधे जल चुके हैं।
कहा कि जंगलों में आग लगाने वाले लोगों पर सरकार द्वारा वन और वन्य जीवों को आग से बचाने के लिए चलाए गए जागरूकता अभियानों को कोई असर होता नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन संगठन, कृषक क्लब और वन पंचायतों के सरपंच शीघ्र वन क्षेत्राधिकारी से मिलकर गांव के लोगों को आग बुझाने का प्रशिक्षण, जागरूकता कार्यक्रम चलाने की मांग करेंगे। वन क्षेत्राधिकारी से वनों को आग से बचाने के लिए कड़े नियम बनाने का अनुरोध किया जाएगा। आग बुझाने में परिवर्तन संगठन के पुष्कर ठगुन्ना, रोहित खाती, कृषक कल्ब के मदन ठगुन्ना, भूपाल चंद आदि शामिल थे।
इरादतन आग लगाने वालों पर मुकदमा दर्ज होगा
बलुवाकोट के जंगलों में इरादतन आग लगाने के मामले को विभाग ने गंभीरता से लिया है। वन रेंजर सुनील कुमार ने कहा कि अब वनकर्मियों को जंगल में गश्त के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई आग लगाते पकड़ा गया तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा।