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जौलजीबी मेले का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा

Thu, 14 Sep 2017 10:53 PM IST
केबी पाल/अमर उजाला, अस्कोट
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पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाला जौलजीबी मेला क्षेत्र और झूलापुल - फोटो : अमर उजाला
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पंचेश्वर बांध के बनने पर जौलजीबी मेले का अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा। पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में जौलजीबी मेला स्थल के साथ ही जौलजीबी के ज्वालेश्वर महादेव मंदिर, हनुमान मंदिर और अन्नपूर्णा मंदिर भी आ रहे हैं। जौलजीबी बाजार की करीब 150 दुकानें पंचेश्वर बांध में जलमग्न होंगी।
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जौलजीबी मेले की शुरुआत 1874 में अस्कोट पाल राजवंश के तत्कालीन राजा पुष्कर पाल ने की थी। राजा की तरफ से ही मेले की सारी व्यवस्थाएं की जाती थी और गोरी नदी में अस्थायी पुल का निर्माण भी किया जाता था। बाद में मेले की व्यवस्था सरकारी तौर पर होने लगी। मेला स्थल पर स्थायी रूप से मंच भी बना है। जौलजीबी मेले का व्यापारिक महत्व ज्यादा है। तिब्बत व्यापार में भाग लेकर लौटने वाले सीमांत के व्यापारी अपने सामान को बेचने के लिए जौलजीबी मेले में आते हैं।

नेपाल के गांवों से भी कई लोग और व्यापारी मेले में हिस्सा लेते हैं। अस्कोट के राजा ने अपनी 56 नाली जमीन मंदिरों के निर्माण के लिए और 32 नाली जमीन मेला क्षेत्र के लिए दी थी। जौलजीबी मेले में कुमाऊं के हर हिस्से से लोग पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बांध की ऊंचाई कम की जाती तो जौलजीबी डूब क्षेत्र में आने से बच जाता। पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाला यह आखिरी छोर है। इसके बाद धारचूला की तरफ सिर्फ बगड़ीहाट का कुछ हिस्सा ही डूब क्षेत्र में है।
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पंचेश्वर बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में उल्लेख है कि बांध के डूब क्षेत्र में राजकीय इंटर कॉलेज, लोनिवि का विश्रामगृह भी आएगा। इस तरह संपूर्ण जौलजीबी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। पिथौरागढ़-तवाघाट हाइवे, इस हाइवे पर जौलजीबी में बना मोटर पुल भी डूब क्षेत्र में है। कैलाश मानसरोवर यात्रा इस समय इसी मार्ग से होती है।

नेपाल को जोड़ने वाला झूलापुल भी डूबेगा
जौलजीबी में नेपाल को जोड़ने के लिए महाकाली पर बना झूलापुल भी डूब क्षेत्र में आ रहा है। 2013 की आपदा के समय बहे इस पुल का पुनर्निर्माण 2014 में नेपाल सरकार ने किया था। दोनों देशों के बीच आवागमन का यह प्रमुख साधन है। झूलापुल के डूबने पर भारत और नेपाल के लोग भारी संकट में आ जाएंगे। इससे दोनों देशों के सामाजिक रिश्तों पर भी असर पड़ेगा। इस समय दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी के रिश्ते हैं।
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