पिथौरागढ़। मानसूनी बारिश के बीच सीमांत जिले में पीलिया और टाइफाइड तेजी से फैल रहा है। खासकर बच्चे इन बीमारियों की जकड़ में आ रहे हैं। जिला अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक हर 18वां मरीज पीलिया या टाइफाइड से ग्रसित मिल रहा है। इसमें बच्चों की संख्या 15 से 20 है। चिकित्सकों ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए दूषित पानी इसका प्रमुख कारण बताया है।
जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 750 ओपीडी हो रही है। बड़ी संख्या में धारचूला, डीडीहाट, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग सहित अन्य दूरस्थ क्षेत्रों से मरीज इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। जांच में रोजाना 40 से 45 मरीज पीलिया और टाइफाइड से ग्रसित मिल रहे हैं। यही कारण है जिला अस्पताल के वार्ड फुल हो गए हैं और मरीजों को भर्ती करने के लिए बरामदे में बिस्तर लगाने पड़ रहे हैं।
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, वर्तमान में 120 बेड की क्षमता के सापेक्ष 165 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 50 से अधिक मरीज टाइफाइड और पीलिया से जूझ रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जेएस नबियाल ने बताया कि अधिकांश बच्चे इन बीमारियों से ग्रसित मिल रहे हैं जो चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि दूषित पेयजल और भोजन इसका मुख्य कारण है। नगर के साथ ही गंगोलीहाट, डीडीहाट, बेड़ीनाग, मुनस्यारी सहित अन्य हिस्सों में मानसूनी बारिश के बाद पंपिंग योजनाओं और जल स्रोतों में मलबा भरने से घरों में मटमैले पानी की आपूर्ति हो रही है।
अंदाजा लगाया जा रहा है कि यही मटमैला और दूषित पानी टाइफाइड और पीलिया का कारण बन रहा है।