जौलजीबी मेले के व्यापार पर असर पड़ने की आशंका
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भारत और नेपाल की सीमा पर महाकाली के किनारे जौलजीबी में 14 नवंबर से शुरू हो रहे ऐतिहासिक और व्यापारिक मेले पर इस बार पुराने नोटों का प्रचलन बंद होने का बड़ा असर पड़ सकता है। लोग इस बात से आशंकित हैं कि यदि 13 नवंबर तक बैंकों में नए नोट नहीं पहुंचते तो करीब 10 करोड़ रुपए के व्यवसाय वाले इस मेले पर गंभीर असर पड़ जाएगा।
ठीक मेले से पहले आठ नवंबर की रात केंद्र सरकार ने 500 और 1000 के नोटों के प्रचलन पर रोक लगा दी है। पुराने नोट प्रचलन से बाहर हो गए हैं और नए नोट बैंकों में नहीं आ पाए हैं। छोटे नोट जिन लोगों के पास हैं वह उनको खर्च नहीं कर रहे हैं। जौलजीबी मेले में नेपाल के लोग भी बड़ी संख्या में आते हैं वह भी नेपाली मुद्रा को एक्सचेंज करने के बाद ही सामान की खरीददारी करते हैं। इस बार इस पर असर पड़ जाएगा। व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र थापा इस बात के लिए आश्वस्त हैं कि 13 नवंबर तक बैंकों में नए नोट आ जाएंगे और व्यापार के लिए लोगों के पास पैसा आ जाएगा।
जौलजीबी व्यापार संघ के अध्यक्ष धीरेंद्र धर्मशक्तू, वरिष्ठ व्यापारी गिरीश अवस्थी, समाजसेवी लीला बनग्याल का कहना है कि रुपए की कमी का असर व्यापार पर पड़ेगा। वह कहते हैं कि हालांकि व्यापारियों ने मेले के लिए सामान पहले ही खरीद लिया था और तिब्बत की मंडी का सामान पहले ही पहुंच चुका है। सामान की तो कमी नहीं होगी लेकिन खरीददारों की संख्या कितनी रहती है यह 14 नवंबर को मेला शुरू होने के बाद ही पता चलेगा।