पिथौरागढ़। दानवीर जसुली देवी शौक्याणी की धर्मशालाओं से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर दारमा सेवा समिति आगे आई है। समिति की पदाधिकारियों का कहना है कि कई स्थानों में जसुली देवी शौक्याणी की धर्मशलाओं में लोगों ने खुद को जसुली देवी का वारिस बताकर अतिक्रमण कर रखा है जबकि उनका कोई वारिस नहीं है। उन्होंने सरकार से जसुली देवी शौक्याणी की धर्मशालाओं और भूमि को सरकारी घोषित कर जनहित और रं समुदाय के हित में उपयोग करने की मांग की है।
बृहस्पतिवार को सामाजिक कार्यकर्ता शकुंतला दताल और दिलिंग दारमा सेवा समिति की उपाध्यक्ष छोरी देवी डीएम कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने यहां डीएम रीना जोशी को ज्ञापन सौंपकर कहा कि महान दानवीर जसुली देवी शौक्याणी ने जनहित के लिए अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, हल्द्वानी सहित कई अन्य हिस्सों में धर्मशालाएं बनवाई थीं। इन धर्मशालाओं का उपयोग कैलास यात्री, व्यापारी और पैदल आवाजाही करने वाले स्थानीय लोग करते थे।
उन्होंने कहा कि जसुली देवी शौक्याणी की बनवाई धर्मशालाओं में अतिक्रमण किया जा रहा है। जसुली देवी शौक्याणी इकलौती थी लेकिन कुछ लोग स्वयं को उनका वारिस बताकर धर्मशालाओं में अतिक्रमण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता सोबन सिंह दरियाल, धर्म सिंह बौनाल, डुंगर सिंह ढकरियाल, जयमल पधान, शेर सिंह दुग्ताल, सुंदर सिंह बौनाल ने न्यायालय में लंबी लड़ाई लड़ी, लेकिन धन के अभाव में मामला लटक गया।
उन्होंने कहा कि बागेश्वर में बाहरी लोगों को शामिल कर कमेटी का गठन कर ट्रस्ट रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है जो न्यायोचित नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्मशालाओं की देखरेख दिलिंग दारमा सेवा समिति और रं कल्याण संस्था करती है। उन्होंने प्रशासन से सभी धर्मशालाओं से अतिक्रमण को हटाकर उन्हें सरकारी संपति घोषित करते हुए जनहित और रं कल्याण संस्था के हित में उपयोग करने की मांग की है।