दानीबगड़ जाने के लिए रस्से के सहारे नदी पार करते शिक्षक कुंवर
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दो जुलाई की आपदा ने मुनस्यारी तहसील के लोदीबगड़ और दानीबगड़ के हालात इस कदर बिगाड़ दिए हैं कि लोदीबगड़ के बच्चे दानीबगड़ स्कूल में पढ़ने नहीं जा पा रहे हैं। लोदीबगड़ और दानीबगड़ को जोड़ने वाला पुल आपदा की भेंट चढ़ चुका है। शिक्षक लोहे के रस्से के सहारे जान जोखिम में डालकर उफनाए गधेरे को पार कर रहे हैं। छोटी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए लोदीबगड़ गांव में कक्षाओं का संचालन करना पड़ रहा है।
दानीबगड़ में प्राथमिक पाठशाला और कन्या जूनियर हाईस्कूल है। पुल बहने से स्कूलों के संचालन में दिक्कत हुई तो शिक्षकों ने गांव के लोगों के साथ मिलकर प्यानागाड़ में लोहे का तार डाला। उसी से लोग लोदीबगड़ और दानीबगड़ के बीच आवागमन कर रहे हैं। कन्या जूनियर हाईस्कूल दानीबगड़ में कार्यरत शिक्षक जोध सिंह कुंवर रोज तार के सहारे गधेरे को पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं। वहां पर जूनियर और प्राथमिक की कक्षाओं का संचालन हो रहा है। छोटी कक्षाओं में पढ़ रहे लोदीबगड़ के बच्चे दानीबगड़ जाने में असमर्थ हैं। उनके लिए लोदीबगड़ में ही महेंद्र राम के मकान के बरामदे में शिक्षक दीप बिष्ट और बलवंत राम कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं।
जिस मकान में कक्षा का संचालन हो रहा है, वह भी खतरे की जद में है। खतरे को देखते हुए महेंद्र राम के परिवार ने गांव में ही शरण ले रखी है। लोदीबगड़ और दानीबगड़ की तबाही को देखते हुए लोनिवि ने गधेरे में ट्राली लगाने की बात कही थी, लेकिन अब तक ट्राली नहीं लग पाई है। इससे दोनों गांवों के लोगों में रोष है। वहीं, धारचूला विधायक हरीश धामी ने कहा कि वह इस मामले को विधानसभा में भी उठाएंगे। उन्होंने कहा कि बृहस्पतिवार को वह स्वयं नदी में डाले रस्से से दानीबगड़ जाएंगे। यदि कोई हादसा होता है तो उसके लिए विभाग और सरकार जिम्मेदार रहेगी।