गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। तहसील क्षेत्र के दूरस्थ गांव नैचुना के ग्रामीण दशकों से पक्की सिंचाई नहर की राह देख रहे हैं। इस गांव के लिए सिंचाई नहर बनाने के लिए मनरेगा के तहत तैयार किया गया प्रस्ताव सिंचाई विभाग की फाइलों में उलझा हुआ है। सिंचाई नहर के अभाव में 60 परिवार अपनी उपजाऊ भूमि में पैदावार नहीं बढ़ा पा रहे हैं।
गेहूं, धान, सब्जियों, आम, अमरूद, केला, लीची के लिए यहां की जमीन अनुकूल है लेकिन सिंचाई के लिए एक पक्की नहर लोगों के पास नहीं है।
जबकि इस गांव में पानी की कोई कमी नहीं है। गांव में एकमात्र पुश्तैनी कच्ची नहर बहुत पुरानी हो चुकी है। कई जगह से टूट चुकी है। इसमें कई जगह से बहने लगता है।
इस सिंचाई नहर में हर छह माह में घास उग जाती और नहर कच्ची होने के कारण कई जगह से टूट जाती है। कुछ महीनों के बाद नहर सूख जाती है। सिर्फ रोपाई के समय गांव वाले मिलकर इसकी सफाई करते हैं।
दो वर्षों से ग्राम प्रधान मोहन सिंह मेहरा लगातार नहर की सफाई करा रहे हैं। आजकल गांव में रोपाई का काम चल रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को सिंचाई नहर को बार-बार ठीक करना पड़ता है।
पुरानी नहर में सुधार की जरूरत
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। नैचुना में दो किमी लंबी नहर का सुधारीकरण किया जाता है तो गांव की 500 नाली से अधिक भूमि सिंचाई के योग्य हो जाएगी। इससे गांव में फसलों की पैदावार बढ़ेगी और गांव के लोग अपनी आजीविका बढ़ा सकते हैं। गांव की आबादी 300 से अधिक है।
सिंचाई विभाग के पास अभी गांव से सिंचाई नहर का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। यदि प्रस्ताव आया होगा तो शीघ्र ही सर्वे कर प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
- सनित रावत, एई लघु सिंचाई पिथौरागढ़।
सिंचाई विभाग को कई बार प्रस्ताव बनाकर दिया जा चुका है। कार्यवाही नहीं हो पाई है। विकासखंड में भी मनरेगा के तहत गांव की ओर से सिंचाई नहर के निर्माण के लिए प्रस्ताव दिया गया है। लोगों की आजीविका बढ़ाने के लिए नहर निर्माण जरूरी है।
- मोहन सिंह, प्रधान।
अगर पक्की नहर का निर्माण हो जाता है तो गांव के खेतों में साल भर पानी रहेगा। लोग सब्जी उत्पादन का काम अच्छी तरह से कर सकेंगे। उसे बाजार में बेचकर अपनी आय बढ़ाएंगे।
- खीम सिंह, ग्रामीण
कच्ची नहर बारिश में कई जगह टूट जाती है। कई बार गधेरों का मलबा भी नहरों में आ जाता है। इसे हटाने में चार से पांच दिन लग जाते हैं। यदि एक बार पक्की नहर का निर्माण हो जाएगा। लोगों को इस समस्या से निजात मिल जाएगी।
- वीरेंद्र सिंह, ग्रामीण