थल मेले में शुक्रवार को आधी रात के बाद तक लोग गीत और नृत्य की मस्ती में झूमते रहे। लोक जनजागृति कला केंद्र बिंदुखत्ता की टीम ने जमकर धमाल मचाया। टीम नायक प्रह्लाद मेहरा और मीना राणा में मंच पर एक से बढ़कर एक गीत पेश किए। उन्होंने जब-तेरी बलाई ल्यूंलो मेरी प्यारी दरमियाणी, तेरो दगड़ो भलो लागि रे मेरी भाना दरमियाणी गीत गाया तो दर्शक अपनी सीटों से उठकर नाचने लगे। मीना राणा ने अलग से पांच गीत गाए।
लोकगायक पप्पू कार्की ने पारी भीड़ा की बसंती छोरी रुमाझुम गीत पेश किया तो लोग झूमने लगे। जौनपुर जागृति कला मंच के अर्जुन सेमक्याल के नेतृत्व में पहुंची कलाकारों की टीम ने भी कई गढ़वाली लोकगीत पेश किए। इनके अलावा जन्मांध सुंदर बाफिला, मोहित कुमार, भुवन पंत, तारा पथनी ने भी कई गीत प्रस्तुत किए। वाद्ययंत्र बजाने वाली टीम में अजय कुमार, शेखर कुमार, मो. अरसद खान, चंदन और सर्वजीत टम्टा थे। राजपूत एलीमेंट्री स्कूल के बच्चों ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राज्य आंदोलनकारी गजेंद्र सिंह गंगू ने कहा कि सरकार को थल में सांस्कृतिक मंच तैयार करना चाहिए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन कै. दीवान सिंह वल्दिया और विभु कृष्णा ने किया। इस मौके पर दान सिंह बिष्ट, राम सिंह जंगपांगी, दिनेश पाठक, केजी पंत, देवराज सत्याल, सुनील सत्याल, हरीश जोशी, डीके भट्ट, मोहन भट्ट, मनोहर आर्या, प्रवीण जंगपांगी, मनोज जंगपांगी, रिजवान अली आदि मौजूद थे। मेला कमेटी के अध्यक्ष शमशेर सत्याल ने कहा कि कम संसाधनों के बावजूद इस बार भव्य कार्यक्रम हो रहे हैं।
मोस्टा कारीगरों में मायूसी का आलम
थल मेले में मोस्टा (रिंगाल की चटाई) बेचने वालों की मायूसी बढ़ती जा रही है। हर साल इनकी बिक्री कम हो रही है। कारीगरों की लागत तक नहीं निकल पा रही है। अब जंगलों में रिंगाल कम हो रही है। उसको लाने में भी कई प्रकार के प्रतिबंध हो गए हैं। मुनस्यारी के गिनीबैंड निवासी कुंवर राम इस बार सिर्फ तीन मोस्टे लेकर आए। इनमें से सिर्फ दो ही बिके हैं। एक मोस्टा की कीमत 2500 रुपये रखी गई है। इसको तैयार करने में दस दिन का समय लगता है। पहाड़ के लोग पहले फसलों को सुखाने के लिए मोस्टा का ही उपयोग करते थे। पिछले कुछ वर्षों से इसकी जगह तिरपाल ने ले ली है। किमखेत निवासी भुवन राम पांच मोस्टे लेकर आए। अब तक चार बिक गए हैं। डोर निवासी तिलराम के चार मोस्टों में से दो बिके हैं। गिनीबैंड निवासी जगत राम भी सिर्फ तीन ही मोस्टे लेकर आए। उनके भी दो ही मोस्टे बिक पाए हैं। गिनी बैंड के ही नर राम तीन मोस्टे लाए, लेकिन उनका एक ही मोस्टा बिका है। कारीगरों ने बताया कि रिंगाल को लाने के लिए कालामुनि के पास बाराभेली के जंगलों में जाना पड़ता है। वहां अब रिंगाल कम होता जा रहा है।