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पारी डाना बुरुंशी फूली छ...

Sat, 14 Apr 2018 10:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
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थल मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते स्कूली बच्चे - फोटो : अमर उजाला
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थल मेले की पहली शाम झुमिगो फेम बिन्नी महर, लोक गायक प्रकाश रावत, मनोहर आर्या, सुंदर राम, संदीप लोहिया, मोहित कुमार, नवराज भैंसोड़ा, प्रकाश रावत, रमेश जगरिया, संजू राणा, सुंदर बाफिला के नाम रही। स्कूली विद्यार्थियों ने भी एक से बढ़कर एक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

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सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत राजपूत ऐलिमेंट्री पब्लिक स्कूल के बच्चों ने ओ नंदा भगवती तू दैण हो जाए, नेपाली सामूहिक नृत्य परखा-परखा मयालु पेश कर समां बांधा, शिवालिक पब्लिक स्कूल थल और मल्लिकार्जुन विद्यापीठ के बच्चों ने भी कार्यक्रम पेश किए। स्टार नाइट में झुमिगो फेम बिन्नी महर ने पारी डाना बुरुंशी फूली छ, मैं जै कुंछू मेर हीरू ऐ रे छ गाकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा ने किया। आयोजकों ने मंत्री को शाल ओड़ाकर, स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर खुशाल सिंह भंडारी, श्री रामलीला समिति के अध्यक्ष देवराज सत्याल, व्यवस्थापक दिनेश पाठक, मंत्री अर्जुन सिंह, कोषाध्यक्ष प्रवीण जंगपांगी, गंगा सिंह मेहता, मनोहर सत्याल, केएन जोशी, भूपेंद्र जंगपांगी, दीपक भैसोड़ा, मनोज गोस्वामी, सुनील सत्याल मौजूद थे। संचालन केजी पंत, धर्मेंद्र सिंह बसेड़ा ने किया।
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रातभर चलते रहे भगनौला
थल मेले में रातभर भगनौला की धूम रही। भगनौला की अनोखी गायन शैली ने लोगों का खूब मनोरंजन किया। भगनौला गायन से प्रश्न-उत्तर के साथ कुशलक्षेम पूछने की बहुत पुरानी लोक संस्कृति रही है। मूर्ति गांव के 77 वर्षीय मोती राम, कुमालगौनी के 63 वर्षीय बहादुर राम, सैनर के 87 वर्षीय शेर राम, नापड़ के 65 वर्षीय दीवान राम, कलानी के 50 वर्षीय आनंद अधिकारी, प्रेमनगर निवासी 61 वर्षीय कुशी राम, कोटगाड़ी निवासी 51 वर्षीय गणेश जोशी, गिनी निवासी 57 वर्षीय गोपाल सिंह नेगी, डोनू के 76 वर्षीय हरि राम, मल्ला भैंसकोट के 84 वर्षीय रूप राम, कांडेकिरौली के 45 वर्षीय राजन राम ने तिमुली को पात न धौ के धिनाली खाई, न चुपड़ी हाथ, रहाटे की तान ग्यूं घालनी घाम, राम ज्यू को भजन करो रोजे रात्ते ब्याले, सबै जंगले को आगि लागि, मृग क्या खावे क्या रोवे, सुपत्ति को सब बांटे बिपत्ति न बांटे कोय आदि बोलों के साथ धूम मचाई।

बैसाखी पर रही भारी भीड़
विषवत संक्रांति को प्राचीन बालेश्वर महादेव के मंदिर में 25 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। रामगंगा के तट पर लगने वाले मेले के दौरान हर साल बैसाखी के दिन भारी संख्या में लोग जुटते हैं। हिंदू नववर्ष में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर लोग अरिष्टों के निवारण के मंदिर में पूजा, अर्चना करते हैं। शिव मंदिर में जल चढ़ाते हैं।

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