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पीड़ा: गांवों तक रोड नहीं...डोली ही घायलों का सहारा, घायल युवक-बीमार बुजुर्ग को ग्रामीणों ने सड़क तक पहुंचाया

Tue, 08 Apr 2025 01:31 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़

सार

पिथौरागढ़ जिले के गांवों में अब तक सड़क न पहुंचने से बीमार, गर्भवतियों के साथ ही सभी ग्रामीण दुश्वारियां झेल रहे हैं। बंगापानी के शिलिंग खर्तोली निवासी घायल युवक और अस्कोट के दारती निवासी बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचने के लिए डोली ही सहारा बनी।
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घायल युवक को डोली के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पिथौरागढ़ जिले के बंगापानी और अस्कोट के गांवों में अब तक सड़क न पहुंचने से बीमार, गर्भवतियों के साथ ही सभी ग्रामीण दुश्वारियां झेल रहे हैं। गांवों तक सड़क न होने से बीमारों, गर्भवतियों को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना मजबूरी बन गया है। बंगापानी के शिलिंग खर्तोली निवासी घायल युवक और अस्कोट के दारती निवासी बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचने के लिए डोली ही सहारा बनी।

बंगापानी तहसील क्षेत्र के शिलिंग खर्तोली निवासी ठाकुर सिंह महरा बीते दिनों भीमताल में बस दुर्घटना में घायल हो गया था। कमर में चोट आने से वह चलने में असमर्थ है। उसे इलाज के लिए हल्द्वानी जाना था लेकिन गांव तक सड़क नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों ने उसे बदहाल रास्तों पर डोली के सहारे तीन किमी दूर बंगापानी तक पहुंचाया, तब जाकर उसे वाहन नसीब हुआ।

वहीं अस्कोट क्षेत्र के दारती गांव स्थित देवी मंदिर के पुजारी त्रिलोचन ओझा का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया। गांव तक सड़क न होने से परिजनों और ग्रामीणों के लिए उन्हें अस्पताल पहुंचाना चुनौती भरा साबित हुआ। डोली के सहारे उन्हें ढाई किमी दूर अस्कोट स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना पड़ा, तब जाकर उन्हें इलाज मिला। सीमांत जिले में अब भी ऐसे गई गांव हैं जो सड़क से वंचित हैं। ऐसे में आए दिन यहां बीमारों और गर्भवतियों को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने कहा कब पहुंचेगी गांवों तक सड़क

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एकता मंच के तरुण पाल सहित क्षेत्र के अन्य लोगों ने कहा कि सड़क न होने से समय पर बीमारों और गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। कहा कि क्षेत्र में पसमा, अस्कोट-दयाकोट-जमतड़ी, देवल-दारती सहित अन्य सड़कें सालों पहले स्वीकृत हो चुकी हैं। अब तक सड़कों का निर्माण नहीं हो सका है। ऐसे में बीमार और गर्भवतियों की जान आफत में फंस रही है तो ग्रामीण पलायन करने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है कि सड़क के लिए अब कौन से दर पर गुहार लगाएं।

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