बेड़ीनाग के गांवों में भांग के पौधों के डंठलों में लगाई गई आग
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बेड़ीनाग बाजार और आसपास के गांवों में नारकोटिक्स पदार्थों के खिलाफ सरकारी टीम की छापेमारी की अफवाह से अफरातफरी का माहौल रहा। लोगों ने अपने घरों में मौजूद भांग के पौधे से प्राप्त होने वाले पदार्थों को जला दिया। यह अफवाह बाजार से गांवों की तरफ फैली और लोगों ने घरों में रखे भांग के दानों, रेशे और पौधों के ठूंठों को जला दिया। सूचना है कि इस दौरान बड़े पैमाने पर चरस भी नष्ट की गई। छापेमारी की बात अफवाह निकलने पर लोगों ने राहत की सांस ली।
पर्वतीय क्षेत्रों में भांग की फसल को परंपरागत रूप में उगाया जाता है। इससे प्राप्त बीजों को सब्जियों में मसाले के रूप में बहुतायत प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा इसके तने के रेशे से मजबूत डोरियां और कुथले (थैले) बनते हैं, लेकिन इससे मिलने वाला मादक पदार्थ चरस और गांजा इसका नकारात्मक पहलू है। उपयोगी पदार्थों के अलावा लोग मादक पदार्थों के लिए भी भांग की खेती करते हैं। उच्चतम न्यायालय के एक आदेश के बाद इसे अफीम की तरह ही प्रतिबंधित मादक पदार्थों की सूची में रखा गया है।
कुछ माह पहले मुख्यमंत्री हरीश रावत की तरफ से इसकी खेती को प्रोत्साहन देने की बात काफी चर्चा में रही थी। इसका विरोध भी हुआ था। बाद में बताया गया था कि वैज्ञानिकों ने मादक पदार्थ रहित भांग के पौधे तैयार किए हैं। इधर, थाना प्रभारी बलवंत कांबोज का कहना है कि प्रतिबंधित मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के लिए ड्रग्स इंसपेक्टर के नेतृत्व में जिले में टीम गठित की गई है। इस टीम के यहां आने की उनके पास फिलहाल सूचना नहीं है।