मवेशियों की पीठ पर सामान लादकर प्रवास पर जाते नेपाल के परिवार। संवाद
धारचूला/पिथौरागढ़। भारत एवं चीन सीमा पर स्थित नेपाल के अंतिम गांव छांगरू और तिंकर के लिए नेपाल के लोगों ने जानवरों के साथ माइग्रेशन शुरू कर दिया है। नेपाल के लगभग डेढ़ सौ परिवार प्रवास के लिए हर साल भारत के रास्ते अपने मूल गांवों में जाते हैं। तहसील प्रशासन ने माइग्रेशन पर जाने वाले भारतीय और नेपाली नागरिकों के अब तक 800 इनरलाइन पास जारी कर दिए गए हैं।
इस साल अप्रैल आखिरी सप्ताह से नेपाल के लोगों ने माइग्रेशन पर जाना शुरू कर दिया है। मवेशियों के साथ नेपाल से झूलापुल के रास्ते धारचूला आकर सीतापुल से छांगरू और तिंकर गांवों में प्रवेश करते हैं। यह परिवार लगभग छह माह तक वहां पर खेती और पशुपालन का कार्य करने के बाद अक्तूबर अंतिम सप्ताह से लौटना शुरू करेंगे।
छांगरू और तिंकर गांव बेहद दुर्गम में हैं। नेपाल अब तक इन गांवों तक पहुंचने के लिए मार्ग का निर्माण नहीं कर सका है। ऐसे में माइग्रेशन वाले परिवार भारतीय मार्ग से ही अपने मूल गांवों के लिए आवाजाही करते हैं। धारचूला के संयुक्त मजिस्ट्रेट दिवेश शाशनी बताया कि इनरलाइन पास जारी किए जा रहे हैं।