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सीमावर्ती बाजारों में भारतीय मुद्रा का संकट

Sun, 05 Aug 2018 10:39 PM IST
राजेश पंगरिया/अमर उजाला, झूलाघाट
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भारतीय मुद्रा का संकट - फोटो : अमर उजाला
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भारत-नेपाल सीमा के बाजारों में भारतीय करेंसी का संकट है। यह संकट यारसागंबू (कीड़ा जड़ी ) का कारोबार शुरू होने के कारण आया है। नेपाल में यारसागंबू की बिक्री शुरू होने से अगले दो महीनों तक बाजारों में भारतीय मुद्रा की कमी बनी रहेगी। इससे यहां तीन प्रतिशत अधिक कीमत देकर नेपाली मुद्रा के बदले भारतीय मुद्रा लेने का कारोबार फल फूल रहा है।

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नेपाल सीमा से लगे धारचूला, जौलजीबी और झूलाघाट के दोनों ओर की बाजारों में दोनों देशों की मुद्रा का चलन में है। दोनों बाजारों में भारतीय एवं नेपाली करेंसी अपने वास्तविक मूल्य पर ही चलन में रहती है। 15 जुलाई सेे कुछ महीनों तक यारसागंबू की बिक्री के कारण नेपाली मुद्रा भारतीय बाजारों में ज्यादा मात्रा में आ जाती है। इससे दोनों देशों की करेंसी की अदला बदली का कारोबार भी तेज हो जाता है। नेपाली मुद्रा के बदले भारतीय मुद्रा देने में दो से तीन प्रतिशत का कमीशन भी लिया जाता है। 

इन दिनों नेपाल के लोग उच्च हिमालयी क्षेत्रों से कीड़ा जड़ी लेकर लौटते हैं। नेपाल में इसका काम करने वाले ठेकेदार उनको इसकी बिक्री के एवज में नेपाली करेंसी देते हैं। गांव के लोग मुद्रा को दोनों देशों के बाजारों में खर्च करते हैं। जिससे नेपाली मुद्रा बहुत मात्रा में आ जाती है। 
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20 लाख तक है कीड़ा जड़ी का भाव
कीड़ा जड़ी को निकालने के बाद ग्रामीणों को इसकी बिक्री पर 20 लाख नेपाली (12.50 लाख भारतीय मुद्रा) प्रति किलोग्राम का भाव मिलता है। नेपाल में यारसा गंबू के व्यापार को वैध है। यहां पर वन विभाग को कर का भुगतान करने के बाद कहीं भी ले जाया जा सकता है। इस कारण भारत से अवैध तरीके से जाने वाली कीड़ाजड़ी नेपाल में कर चुकता करने के बाद वैध हो जाती है।
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25 हजार रुपये तक ही भारतीय करेंसी ले जाने की अनुमति
भारत से नेपाल को कोई भी व्यक्ति 25 हजार रुपये से ज्यादा नहीं ले जा सकता।  सीमा पुल पर तैनात सुरक्षा एजेंसियां इसकी जांच करती हैं। 

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