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महाकाली का जलस्तर बढ़ा

Thu, 07 Jul 2016 10:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट
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महाकाली के किनारे नेपाल की तरफ बने फड़ - फोटो : अमर उजाला
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झूलाघाट में महाकाली चरम वेग पर है। अब हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। इसके अलावा कई हिस्सों में हो रही बारिश से नदी की रफ्तार तेज होती जा रही है। बृहस्पतिवार को महाकाली का जलस्तर 888.28 मीटर आंका गया। नदी में खतरे का निशान 890 मीटर पर लगा है। भारतीय क्षेत्र के साथ-साथ नेपाल में भी नदी के कटाव का खतरा बढ़ रहा है।
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नेपाल की तरफ तो नदी के किनारे ही अस्थायी फड़ बने हैं, इनमें काम करने वाले व्यवसायी रात के समय सामान उठाकर ले जाते हैं और सुबह फिर से उसी तरह सामान लगा देते हैं। जून 2013 की आपदा के समय यह सारे फड़ नदी की भेंट चढ़ गए थे। नेपाल सरकार ने नदी के किनारे फड़ बनाने में पाबंदी लगाई थी, लेकिन लोगों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

दूसरी तरफ भारतीय क्षेत्र में अकेले झूलाघाट में करीब 80 मकान अभी खतरे की जद में हैं। महाकाली ने 2013 में इन मकानों की बुनियाद को खोखला कर दिया है। इनमें से 18 मकान तब गिर गए थे। तटबंधों के निर्माण के बावजूद मकानों की सुरक्षा नहीं हो पाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए हैं, यदि इस मानसून सीजन में नदी का जलस्तर बढ़ता है तो कई मकान खतरे की जद में आ जाएंगे। नेपाल की तरफ झूलापुल के पास भी भूकटाव हो रहा है।
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मदकोट और जौलजीबी खतरे की जद में
मुनस्यारी/धारचूला। 2013 की आपदा के जख्म मदकोट और जौलजीबी कस्बे में साफ नजर आते हैं। सैकड़ों मकान नदी की तरफ लटके हैं। मदकोट में ज्यादा खतरनाक हालत में पहुंचे करीब एक दर्जन मकानों को लोग पहले ही छोड़ चुके हैं। दोनों स्थानों पर तटबंधों के निर्माण का काम जरूर हुआ है, लेकिन यह तटबंध नदी के प्रवाह को कितना सहन कर पाएंगे कहा नहीं जा सकता। प्रशासन आपदा की तात्कालिक घटना के बाद तो राहत और बचाव के कदम उठाता है, लेकिन जो लोग खतरे में हैं उनकी अनदेखी की जाती है।
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