पहाड़ के जंगल इस बार व्यापक रूप से जले हैं। जंगलों के जलने का क्रम चाहे अब धीरे धीरे कम हो रहा है लेकिन उसके परिणाम प्री मानसून या मानसून की पहली बारिश के समय भीषण रूप दिखा सकते हैं। जंगलों में लगी आग से भारी मात्रा में राख और मिट्टी एकत्र हो गई है। जमीन की परत जलने से मिट्टी एकदम कमजोर हालत में है। जंगलों में घास और वनस्पतियों का नामोनिशान मिट गया है। इस कारण पहली बारिश के समय व्यापक स्तर पर नुकसान का अंदेशा विशेषज्ञों ने जताया है।
पहाड़ों में वैसे तो मानसून काल में भूस्खलन, भूकटाव, जमीन धंसने, नदियों का प्रवाह बढ़ने की घटनाएं होते रहती हैं लेकिन यह कहा जाता है कि जिस वर्ष सूखा और आग की घटनाएं अधिक होती हैं उस साल मानसून सीजन में भूकटाव के खतरे बढ़ जाते हैं। इस समय प्रशासन और सरकारी मशीनरी जंगल की आग को नियंत्रित कर लेने के बाद अपने कर्तव्य की इतिश्री मान ले रहे हैं। किसी भी स्तर पर भविष्य के खतरे को लेकर चिंता नहीं जताई जा रही है। बताया गया है कि व्यापक स्तर पर फैली यह आग जमीन के अंदर तक गर्मी को पहुंचा देती है। जब इसमें बारिश का पानी पहुंचेगा तो उस समय विकराल रूप सामने आने लगेगा। पहाड़ में ज्यादातर चीड़ के जंगलों में ही आग फैली है। चीड़ के जंगल ढलान वाले पहाड़ों में ज्यादा हैं। बारिश के समय ऐसे जंगलों के निचले इलाकों को गंभीर खतरा हो सकता है।
आग से कमजोर हो जाती है मिट्टी
पिथौरागढ़। कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा विशेषज्ञ डा. आरके सिंह ने कहा कि जंगल की आग से जमीन की ऊपरी परत भी जल जाती है। मिट्टी और घास की जगह जंगलों में आग के कारण रेतीली मिट्टी नजर आती है। यह मिट्टी जलने से कमजोर हालत में होती है। वह कहते हैं कि आग से जमीन के अंदर के जीवाणु, कवक तो नष्ट हो जाते हैं लेकिन उसके गलत परिणाम गंभीर रूप से सामने आते हैं।
जंगल की राख बहने से बढ़ेगी नदियों की रफ्तार
पिथौरागढ़। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी डा. आरएस राणा का कहना है कि पहली बारिश के समय जंगल में जमा राख तेजी से बहकर नदियों को पाटेगी तो नदियों में गाद भरने लगेगी। इससे नदियों के रुख परिवर्तन, किनारों को काटने की गति बढ़ जाएगी। वह कहते हैं कि मानसून की बारिश शुरू होने से पहले पानी के निकास की सही व्यवस्था की जाए, सड़कों में बंद पड़े कमलठ खोले जाएं और पुलों के आसपास जमा कचरे को हटाया जाए। मानसून प्रबंधन के तहत आपदा प्रबंधन विभाग संबंधित विभागों को इस आशय का पत्र भेज रहा है।
दस वर्षों तक पेड़ों का पनपना संभव नहीं
पिथौरागढ़। मोस्टामानू के प्रगतिशील काश्तकार इकबाल अहमद का कहना है कि इस बार बांज, फल्यांट, बुरांश के जंगलों में भी आग लगी है। आग से नष्ट पौधों को संभलने में दस साल का समय लग जाएगा। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों का पत्र लिखकर कहा है कि जिन जंगलों में आग से ज्यादा नुकसान हुआ है वहां पर नए पौधों के रोपण की अभी से तैयारी की जाए। ताकि नष्ट पेड़ों की भरपाई हो सके।