तिब्बत की मंडी तकलाकोट से लौटे युवा व्यापारी प्रभात और जगदीश
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चीन सरकार ने इस बार भारतीय व्यापारियों पर नया प्रतिबंध लगा दिया है। चीन ने लिपुलेख दर्रे के पार तिब्बती क्षेत्र में घोड़ों से सामान ले जाने पर रोक लगा दी है। व्यापारियों को इस रोक के चलते तिब्बती क्षेत्र में चीन के वाहनों से सामान पहुंचाना पड़ा, जिससे उन्हें करीब चार गुना अधिक भाड़ा चुकाना पड़ा। व्यापारी जिन घोड़ों में यहां से सामान ले गए थे वे लिपुलेख दर्रे से लौटा दिए गए।
बता दें कि व्यापारी गर्वाधार से लिपुलेख तक एक घोड़े को 3000 रुपए में बुक करके ले गए थे, लेकिन लिपुलेख से तकलाकोट तक चीन के वाहन में सामान ले जाने का खर्चा एक हजार युआन यानी 11000 रुपए बैठ गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में एक युआन की कीमत 9.90 रुपए है, लेकिन तिब्बत में भारतीय व्यापारियों को एक युआन के 11 रुपए अदा करने पड़ते हैं।
तिब्बत की मंडी तकलाकोट से तीन महीने बाद लौटे प्रभात तायर और जगदीश गर्ब्याल ने बताया कि चीन सरकार इस व्यापार पर लगातार नए प्रतिबंध लगाती जा रही है। पिछले साल गुड़ और मिश्री की बिक्री पर रोक लगा दी थी। इस बार घोड़ों से सामान ले जाने पर रोक लगा दी। दोनों युवा व्यापारी यहां से चाय, कॉफी, माचिस, क्राकरी, टिन के बॉक्स, एल्युमीनियम के बर्तन, रेडीमेड कपड़े आदि लेकर गए थे, जबकि तिब्बत से जैकेट, कंबल, रजाई, याक की पूंछ, जूते, ऊन जैसी सामग्री लेकर लौटे हैं। दोनों ने बताया कि जुलाई से सितंबर तक व्यापार की गति बहुत धीमी रही। अक्तूबर में जब व्यापार ने गति पकड़ी तो प्रशासन ने 15 अक्तूबर तक लौट आने का आदेश देकर उनकी चिंता बढ़ा दी। हालांकि बाद में यह समयावधि 31 अक्तूबर तक बढ़ा दी गई।