अस्कोट (पिथौरागढ़)। अस्कोट में आयोजित रामलीला के छठे दिन राम-लक्ष्मण और सीता के श्रृंगवेरपुर गंगा तट पहुंचने से लेकर ऋषि वाल्मीकि की सलाह पर चित्रकूट पहुंचने तक की लीला हुई।
केवट प्रसंग में केवट, जल लाकर प्रभु चरण धोने के साथ ही सारे परिजनों पर छिड़कता है और राम-लक्ष्मण से गंगा पार कराने के बदले अंगूठी के बजाय आशीर्वाद मांगता है। राम, लक्ष्मण सीता आगे चलकर भारद्वाज मुनि के आश्रम में अल्प विश्राम के बाद आगे बढ़ते हैं। सीता धूप, भूख और प्यास से व्याकुल होती हैं। तब लक्ष्मण कंद मूल फल और जल लाने जाते हैं। भिल्लों और वनवासिनी से भेंट के बाद वाल्मीकि आश्रम पहुंचते हैं और चित्रकूट को प्रस्थान करते हैं।
उधर अयोध्या में सुमंत दशरथ को राम-लक्ष्मण को वन में छोड़ आने की बात बताते हैं। दशरथ विलाप करते हुए मूर्छित हो जाते हैं। निषाद की भूमिका पूरन पाल और केवट की नितिन पाल ने निभाई। हारमोनियम पर मयंक तबले पर बबलू ने संगत दी। मुख्य अतिथि कांग्रेस प्रदेश सचिव प्रदीप पाल रहे। यहां रोशन लालवानी, हरीश पाल, सुंदर बिष्ट, तेज सिंह आदि मौजूद थे।