टकाना की रामलीला में वनगमन करते राम, सीता, लक्ष्मण
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जिला मुख्यालय में श्रीरामलीला प्रबंधकारिणी समिति की ओर से आयोजित सदर और टकाना की रामलीला में राम वनगमन का मार्मिक दृश्य दिखाया गया। अयोध्या के दूत सुमंत भगवान राम को मनाने के लिए जाते हैं, लेकिन राम ने वापस लौटने से मना कर दिया। व्यथित सुमंत ‘अवध में का मुख ले जाऊं, कहूं क्या पूछे जब राजा’ का मार्मिक गीत गाते हैं।
राम-लक्ष्मण और सीता को केवट नदी पार कराते हैं। सीता-नमो गंगे तरंगे पाप हारी, गीत गाकर गंगा की आराधना करती हैं। उधर, राम के वियोग में दशरथ प्राण त्याग देते हैं। रामलीला प्रबंधकारिणी समिति के सचिव दीपक गुप्ता ने बताया कि सभी लोग रामलीला को सफल बनाने में सहयोग दे रहे हैं।
थल में भी राम वनगमन का ही मंचन हुआ। रामलीला में मुख्य अतिथि जिला बांट माप अधिकारी शांति भंडारी, स्टेट बैंक के मयंक भंडारी और गणेश नेगी थे। थल की रामलीला में राजपूत एलीमेंटी स्कूल की बालिकाओं ने गरबा नृत्य दिखाया। गंगोलीहाट की रामलीला में लोग दूर-दूर से रामलीला देखने आ रहे हैं।
बेड़ीनाग में श्री नागदेव रामलीला कमेटी के तत्वावधान में रामलीला मंचन के दूसरे दिन लीला का उद्घाटन राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य हरी प्रसाद लोहिया ने किया। दूसरे दिन सीता जन्म, ताड़का, मारीच, सुबाहु वध, विश्वामित्र के जनकपुर जाने से लेकर गौरी पूजन तक की लीला हुई।