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राजनीति में जाति के आधार पर न बांटे महिलाओं को

Wed, 03 Apr 2019 11:46 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन अमर उजाला ब्यूरो पिथौरागढ़।
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अपराजिता के तहत पिथौरागढ़ कार्यालय में आयोजित चुनावी चर्चा में शामिल महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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यहां फोकस ग्रुप में महिलाओं ने साफ कहा कि राजनीति में महिलाओें को जाति के आधार पर न बांटा जाए। सरकार बनाने में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं लेकिन राजनीति में वे आज भी वे हाशिए पर हैं।
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अमर उजाला की अपराजिता मुहिम के तहत आयोजित बातचीत में तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित हेमा थलाल ने कहा कि राजनीति में आज भी महिलाएं हाशिए पर हैं। उन्हें राजनीति में भी जाति के आधार पर बांटा गया है। महिलाओं के उत्थान के लिए समान अवसर दिए जाने की जरूरत है।

सामाजिक कार्यकर्ता रेनू ठाकुर ने कहा कि महिलाएं आज भी हिंसा का शिकार हो रही हैं। महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं को अच्छी शिक्षा, अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए पितृ सत्तात्मक सोच से बाहर निकलना होगा। उन्होंने उत्तराखंड महिला नीति बनाने, राष्ट्र के स्तर पर विकास, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य पर नीति बनाने पर जोर दिया।
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रेखा जोशी ने कहा कि बेटी सशक्त तो देश सशक्त होगा। महिलाओं को राजनीति सहित सभी क्षेत्रों में समान अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में महिलाएं सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका में हैं। शोभा जोशी ने कहा कि जो हालात आज से तीन दशक पहले थे वही आज भी हैं। केवल चुनावों में विकास की घोषणाएं की जाती हैं। बाद में उन्हें धरातल पर नहीं उतारा जाता है। अंकिता जोशी ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। इसके बावजूद राजनीति में उनकी भागीदारी न के बराबर है। महिलाओं को समान अवसर दिए जाने की जरूरत है।

तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त एवं उद्यमी देवकी जोशी ने कहा कि महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिया जाना जरूरी है। उमा पांडेय ने कहा कि आज कुछ गिनी चुनी महिलाएं ही समाज में सशक्त भूमिका में हैं। उन महिलाओं को अन्य महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सोचने की जरूरत है। भावना नगरकोटी ने कहा कि महिला जनप्रतिनिधियों की बातों तक को पुरुष प्रधान समाज में अनसुना किया जाता है। राजनीति, सरकारी नौकरी सहित सभी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है। एडवोकेट मीनू बिष्ट ने कहा कि महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ ही परिवार के सदस्यों को भी सकारात्मक होना होगा। कमला ओझा ने कहा कि महिलाओं को पंचायत की तरह लोक सभा और विधान सभा के चुनावों में भी 50 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। मतदाताओं को अधिक से अधिक संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंचकर अच्छी सरकार चुनने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
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