पिथौरागढ़। जिले की सीमांत मुनस्यारी, बंगापानी और धारचूला तहसीलों में आई आपदा ने जन जीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। कई गांव ऐसे हैं जहां प्रशासन के अधिकारी अभी तक नहीं पहुंच पाए हैं। घरों के जमींदोज होने और जमीन के बहने से जंगलों में टेंटों में रह रहे लोगों को अब दूसरे स्थान पर पुनर्वासित करना ही एकमात्र विकल्प है। इस समय आपदा प्रभावितों के लिए प्रशासन किस तरह मदद पहुंचा रहा है और हालात सामान्य होने के बाद प्रभावित गांवों में पुनर्वास या पुनर्निर्माण कार्य कैसे किए जाएंगे। क्षेत्रीय निवासियों की इन सभी चिंताओं को देखते हुए अमर उजाला ने कुमाऊं कमिश्नर अरविंद सिंह ह्यांकी से बातचीत की। प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के अंश...
प्रश्न- पिथौरागढ़ जिले की तीन तहसीलों में आपदा आई है प्रशासन ने क्या इंतजाम किए हैं।
उत्तर- पिथौरागढ़ में जैसे ही आपदा की सूचना मिली तत्काल जिला प्रशासन को मौके पर जाकर बचाव एवं राहत कार्य करने के निर्देश दिए थे। अब भी गांवों में प्रभावितों के लिए की जा रही व्यवस्थाओं को लेकर लगातार डीएम से दिन में तीन से चार बार बात हो रही है। मुनस्यारी तहसील में एसडीएम और तहसीलदार नहीं थे। आपदा की सूचना मिलते ही गंगोलीहाट से एसडीएम और चंपावत से तहसीलदार को मुनस्यारी भेजा गया। एडीएम को मौके पर बने रहने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम स्वयं आपदा पीड़ितों के लिए की जा रही व्यवस्थाओं को देख रहे हैं।
प्रश्न- बंगापानी के गांवों में लोग फंसे हैं। जंगलों में रह रहे हैं उनको मदद नहीं मिल पा रही है।
उत्तर- आपदा प्रभावितों तक मदद पहुंचाने के लिए घटना के दिन ही सेेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी सहित पुलिस और राजस्व टीमों को भेज दिया गया था। कुछ लोगों को वहां से निकाल लिया गया है। जो लोग फंसे हुए हैं उनके लिए हेलीकाप्टर भेजा गया है। हेली से ही उन तक मदद पहुंचायी जाएगी और उन्हें रेस्क्यू किया जाएगा। मदद के लिए प्रभावित गांवों में भी अस्थाई हेलीपैड बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रश्न- हर साल आपदा के बाद भूगर्भ वैज्ञानिकों की जांच रिपोर्ट भेजी जाती है लेकिन सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास नहीं होता, इस बार किस तरह प्रशासन इस मामले में कार्रवाई करेगा।
उत्तर- आपदाग्रस्त इलाकों में भूगर्भ वैज्ञानिकों की टीम भेजी गई है। यह टीम सभी गांवों में जाकर रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट के आधार पर पुनर्वासित करने के लिए कार्रवाई की जाएगी। पिथौरागढ़ के डीएम को भी जांच पड़ताल के लिए कहा गया है। यदि जिले में उपयुक्त स्थान मिला तो वहीं पर प्रभावितों को पुनर्वासित किया जाएगा। यदि जिले में उपयुक्त स्थान नहीं मिला तो अन्य स्थानों पर भी जगह तलाशी जाएगी। आपदा पीड़ितों को हर हाल में सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित किया जाएगा।
प्रश्न- सीमांत क्षेत्र आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। सुरक्षा संबंधी निर्माण कार्य होते हैं लेकिन हर साल आपदा में बह जाते हैं। निर्माण कार्य गुणवत्तायुक्त हो इसके लिए क्या प्रयास होंगे।
उत्तर- भविष्य में जो भी सुरक्षा संबंधी कार्य होंगे उनकी मॉनीटरिंग एसई और चीफ इंजीनियर करेंगे। गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। सड़कों में सुरक्षा दीवारों का निर्माण कार्य हो या फिर नदी किनारे तटबंध या वॉयरक्रेट सहित सभी तरह के कामों को केवल ठेकेदारों के हवाले नहीं किया जा सकता है। निर्माण कार्यों की देखरेख के लिए पीडब्लूडी, सिंचाई विभाग के स्थायी एसई की तैनाती के लिए लिखा गया है। चीफ इंजीनियर को भी क्षेत्र में भेजा जाएगा। डीपीआर से लेकर बेहतर इंप्लीमेंटेसन के लिए अभी से प्लान किया जा रहा है।