\राजस्व क्षेत्र पट्टी गढ़तिर के पास भूनी गांव की दो बुजुर्ग महिलाओं की अस्पताल लाने के दौरान मौत हो गई। सड़क न होने के कारण इन दोनों महिलाओं को ग्रामीण डोली के जरिए अस्पताल ला रहे थे। गांव वालों का कहना है कि सड़क होती तो समय से उपचार दिलाकर दोनों महिलाओं को बचाया जा सकता था।
सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र बोरा ने बताया कि जयंती देवी (68) और धरमा देवी (72) का शनिवार रात अचानक स्वास्थ्य खराब हो गया। उन्हें उल्टी होने लगी। इस पर ग्रामीण दोनों महिलाओं को उपचार के लिए डोली में पैदल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाने लगे तो महिलाओं ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। ग्रामीण दोनों को वापस गांव में ले गए। महिलाओं की आकस्मिक मौत का पता चलते ही गढ़तिर गांव के लोग भी भूनी पहुंच गए। रविवार को दोनों का थल रामगंगा घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
दो बुजुर्ग महिलाओं की मौत से ग्रामीणों में व्यवस्था के प्रति खासा आक्रोश है। उनका कहना है कि चनकाना और गढ़तिर रोड से तीन किमी की दूरी पर स्थित भूनी गांव सड़क से वंचित है। गांव में 25 परिवार निवास करते हैं। गांव के लिए सड़क की स्वीकृति 2014 में मिल गई थी। बावजूद अभी तक गांव सड़क सुविधा से वंचित है।
यूथ कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष कैलाश चन्याल ने कहा कि दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग मरीजों को कई किमी डोली पर ढोने को विवश हैं। कहा कि यदि गांव सड़क से जुड़ा होता तो महिलाओं को चिकित्सालय पहुंचा कर बचाया जा सकता था। ग्रामीण विरेंद्र सिंह, बोरा, किशोर सिंह बोरा, राजेंद्र सिंह बोरा, भूपाल सिंह बोरा, बहादुर सिंह, मदन सिंह, हरीश सिंह, रमेश सिंह, दीवान सिंह, फकीर सिंह ने महिलाओं की आकस्मिक मौत पर रोष जताया है।
भूनी गांव में दो महिलाओं की मौत की जानकारी मिली है। मौत का कारण सड़क न होने से मरीजों का अस्पताल समय से नहीं पहुंचना बताया जा रहा है। मामले की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद नियम संगत कार्रवाई की जाएगी।
- उप जिलाधिकारी तुषार सैनी, बेड़ीनाग