डीडीहाट की रामलीला में लक्ष्मण को लगी शक्ति
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डीडीहाट की रामलीला में मेघनाद के हमले से लक्ष्मण मूर्छित हुए तो भगवान राम अति व्याकुल हो गए। वह बिलख-बिलख कर गाने लगे-मैं रण में अकेला तड़पूं भैया बोल बोल। बाद में सुषैन वैद्य आते हैं। हनुमान संजीवनी बूटी लाते हैं। इसी से लक्ष्मण की मूर्छा दूर होती है। बाद में मेघनाद, कुंभकरण मारे जाते हैं। सुलोचना सती हो जाती है। डीडीहाट की रामलीला में कड़ाके की ठंड के बावजूद लोगों की भीड़ जुट रही है।
अस्कोट की रामलीला में सूर्पणखा पहले भगवान राम को रिझाने का प्रयास करती है। बाद में लक्ष्मण सूर्पणखा की नाक, कान काट देते हैं। बदला लेने के लिए पहुंचे खर, दूषण का वध हो जाता है। सूर्पणखा इस प्रतिशोध का बदला लेने के लिए भाई रावण को उकसाती है। रामलीला में मुख्य अतिथि पूर्व जिपं अध्यक्ष किशन सिंह भंडारी थे।
रामलीला मंचन के साथ साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। रामलीला कमेटी के होशियार पाल, विक्रम पाल, गोविंद भंडारी, तनुज पाल, ललित पाल, मनोज लुंठी आदि व्यवस्था बनाने में जुटे हैं। वड्डा की रामलीला में भी आसपास के गांवों से लोग पहुंच रहे हैं। दिवाली से पहले सभी जगह रामलीला का मंचन पूरा हो जाएगा।