आंवलाघाट जाने वाले रास्ते में गिरे पेड़
- फोटो : अमर उजाला
रसैपाटा से आंवलाघाट जाने वाले रास्ते पर पड़ने वाले चीड़ के जंगल में सैकड़ों पेड़ टूटकर गिर गए हैं, जिससे आंवलाघाट एवं चंडिका मंदिर जाने वाले रास्ता पूरी तरह पेड़ों से पट गया है। इस कारण आवाजाही में भारी दिक्कत आ रही है। कई स्थानों पर बिजली के पोल भी तिरछे हो गए हैं। रसैपाटा से आंवलाघाट जाने वाले रास्ते पर पड़ने वाले भद्रिका गांव के लोगों ने तो इस मुद्दे पर प्रदर्शन भी किया।
बताया गया कि मई और जून के प्रथम पखवाड़े में आए अंधड़ के दौरान रसैपाटा से आंवलाघाट जाने वाले रास्ते में असंख्य पेड़ टूटकर गिर गए। लोगों को इसकी जानकारी तब मिली जब वह चंडिका मंदिर पूजा के लिए गए। करीब चार किलोमीटर के रास्ते में हर जगह चीड़ के बड़े-बड़े पेड़ टूटकर गिर गए हैं। लोगों ने किसी तरह इन पेड़ों को पार कर मंदिर तक जाने का रास्ता बनाया।
जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार ने रास्ते का निरीक्षण करने के बाद बताया कि वन विभाग को यह जानकारी तक नहीं है कि कितने पड़े टूटकर गिरे हैं, क्योंकि अब तक किसी भी कर्मचारी ने इलाके का दौरा नहीं किया है। इधर, डीएफओ के निर्देश पर फारेस्ट गार्ड मनोज तिवारी मौके को चले गए हैं। उन्होंने कहा कि गिरे हुए पेड़ों का छपान कर वन निगम से कटान के लिए कहा जाएगा। यह काम जल्दी शुरू कर दिया जाएगा।
पंचायती जंगलों में भी टूटे असंख्य पेड़
जिले के पंचायती जंगलों को अंधड़ से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। पंचायती जंगलों में आग का असर भी ज्यादा रहा। इस कारण चीड़ के पेड़ों के तने और जड़ खोखले हो गए थे। डीडीहाट तहसील में कई पंचायती जंगलों में भी चीड़ के पेड़ गिरे हैं, लेकिन अब तक उनकी निकासी के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। यदि जल्दी पेड़ों का कटान नहीं होता तो लकड़ी जमीन में ही सड़ जाएगी।