पिथौरागढ़। सीमांत जिले में इस बार भी आपदा ने जमकर कहर बरपाया। छह लोगों ने अपनी जान गंवाई। सैंकड़ों घर क्षतिग्रस्त हुए। कई गोशालाएं भी धराशायी हुईं। मुआवजे के तौर पर प्रभावितों को मामूली रकम ही पकड़ाई गई। आपदा प्रबंधन विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, इस बार अब तक आपदा की 1828 घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं में 98.39 लाख की सहायता राशि बांटी गई है।
आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, इस बार की आपदा में 451 मकान टूटे और छह लोगों को काल के गाल में समाना पड़ा। छह पशुओं को भी अपनी जान गंवानी पड़ी। 12 लोगों की गोशालाएं भी ध्वस्त हो गईं। 1332 लोगों की उपजाऊ भूमि भी आपदा की भेंट चढ़ गई। आपदा प्रभावितों को प्रशासन ने अब तक 98,39,993 रुपये की राहत राशि बांटकर राहत पहुंचाई है। हालांकि मानसूनकाल जारी है और आपदा की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में नुकसान का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है।
जान गंवाने की कीमत मिली चार लाख
इस बार आपदा में जिले में छह लोगों की मौत हुई। एक मृतक की जान की कीमत चार लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दी गई। यानी छह मृतकों के परिजनों को 24 लाख रुपये का मुआवजा बांटकर कभी न मिटने वाले उनके जख्मों पर मरहम लगाया गया है।
पूर्ण रूप से ध्वस्त हुए तीन मकान
इस बार की आपदा में तीन लोगों को अपना आशियाना गंवाना पड़ा। ये पक्के मकान पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। हैरानी है कि लाखों रुपयों से बने इन मकानों का नामोनिशान मिट गया है लेकिन प्रभावितों को इन मकानों का सिर्फ 48,000 रुपये मुआवजा दिया है। यानी एक प्रभावित के हिस्से में मात्र 16,000 रुपये आए हैं। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त 404 पक्के मकानों का 25,92,500 रुपये मुआवजा दिया गया है। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों का प्रभावितों के हिस्से में सिर्फ 8,000 रुपये आए।
क्षतिग्रस्त पक्के मकानों का मिला 26.32 लाख मुआवजा
जिले में आपदा से 42 पक्के मकान तीक्ष्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे। इन प्रभावितों को 26,32,000 रुपये मुआवजा बांटा गया है। यानी एक प्रभावित को अपना मकान खोने की कीमत 62,666 रुपये मिली। वहीं गोशाला ध्वस्त होने पर 12 प्रभावितों को 36,000 रुपये मुआवजा राशि बांटी गई है। वहीं अपनी उपजाऊ भूमि खोने वाले 1332 किसानों को 13,89,213 रुपये मुआवजा राशि मिली है।
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जिले में आपदा से हुए नुकसान का आकलन जारी है। आपदा से जो क्षति हुई है प्रभावितों को इसका मुआवजा तुरंत दिया जा रहा है। आपदा की घटनाएं रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। -योगेंद्र सिंह, एडीएम, पिथौरागढ़